शुरुआती तीन महीनों में एहतियात बरतने की जरूरत
योगाचार्य विकास चमोली ने बताया कि गर्भधारण के तीन महीने तक एहतियात बरतने की जरूरत होती है। बताया कि योगासन सुबह-शाम खाली पेट करें। इसके लिए नाड़ी शोधन प्राणायाम, भ्रामरी प्राणायाम, उज्जायी प्राणायाम, भद्रासन, उत्कटासन, मलासन, ताड़ासन, तिर्यक ताड़ासन लाभकारी होते हैं। गर्भधारण के शुरुआती तीन हफ्ते तक योग नहीं करने की सलाह दी जाती है। शुरुआती दिनों में योग से गर्भपात होने का खतरा बढ़ सकता है।
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मस्कुलर एक्टिविटी की जरूरत होती
योगाचार्य मनोज ने बताया कि सामान्य प्रसव के लिए मस्कुलर एक्टिविटी बेहतर होना बहुत जरूरी है। गर्भस्थ के गले में गर्भनाल फंसने या अन्य गंभीर समस्या होने पर ऑपरेशन करना पड़ सकता है। कोई समस्या न होने पर ऑपरेशन की नौबत नहीं आती है।