उत्तराखंड के भ्रष्ट शहरों में राजधानी दून अव्वल है। बंगलुरू की समाजसेवी संस्था सर्वाग्रह ने एक सर्वे के जरिए ये नतीजा निकाला है।
संस्था की वेबसाइट पर ‘i paid a bribe’ पर प्रदेश के सात शहरों के विभिन्न कार्यालयों में काम के लिए घूस देने वाले लोगों ने अपने अनुभव-शिकायतें दर्ज कराई हैं।
इतने रूपए दिए घूस
प्रदेश में कुल 61 लोगों ने रिश्वत देने की बात साझा की है, जिसमें अकेले दून से ही 37 लोगों ने 17,05,390 रुपए घूस देने की बात कही है। दूसरे नंबर पर 13,63,400 रुपए के साथ रुड़की है। यहां 14 लोगों ने विभिन्न अफसरों-कर्मचारियों को घूस दी।
सितारगंज में एक व्यक्ति ने दो लाख, काशीपुर में तीन लोगों ने 8200, रुद्रपुर में तीन लोगों ने 51,500 और ऋषिकेश में दो लोगों ने सात सौ रुपए रिश्वत देने की बात वेबसाइट पर लिखी है।
शिक्षा विभाग में सबसे ज्यादा घूसखोर
वेबसाइट ने प्रदेश में भ्रष्ट विभागों को भी श्रेणीबद्ध किया है। सात शहरों में दी गई घूस की रकम में सबसे ज्यादा 8,54,700 रुपए शिक्षा विभाग के अफसरों-कर्मचारियों को दिए गए।
बिजली विभाग में 8,50,000 रुपए, पुलिस में 38,050 रुपए, पासपोर्ट में 5,800 रुपए, नगर निगम में 18,800 रुपए, ट्रांसपोर्ट में 1,700 रुपए, स्टांप एंड रजिस्ट्रेशन में 10,700 रुपए, रेलवे में 600 रुपए और अन्य विभागों में कुल 42,050 रुपए की रिश्वत दी गई।
प्रदेश में सिर्फ एक ईमानदार अफसर
वेबसाइट पर लोगों ने घूस देने के अपने अनुभव के साथ ईमानदार अफसरों की भी जानकारी दी है। लोगों को पूरे प्रदेश में सिर्फ स्टांप एंड रजिस्ट्रेशन विभाग में एकमात्र ईमानदार अधिकारी की बात कही है। दूसरी ओर, प्रदेश में दो लोग ऐसे रहे जिन्होंने घूस देने से इनकार किया।
देशभर में बंगलुरू सबसे भ्रष्ट
वेबसाइट पर देशभर से कुल 611 शहरों के 23623 लोगों ने शिकायतें दर्ज कराई हैं। इसमें बंगलुरू को सबसे भ्रष्ट शहर माना गया है जबकि चेन्नई दूसरे, मुंबई तीसरे और दिल्ली चौथे स्थान पर है।
वेबसाइट के मुताबिक इन शिकायतों में देशभर में कुल 59.17 करोड़ रुपए की रिश्वत देने की बात कही गई है।
प्रामाणिकता पर सवाल
वेबसाइट का दावा है कि यहां रिश्वत देने के अनुभव साझा करने वाले लोग असली हैं, लेकिन कुछ लोग इसकी प्रामाणिकता पर सवाल उठा रहे हैं। वेबसाइट पर कोई भी अपनी शिकायत दर्ज करा सकता है।