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2013 में उत्तराखंड को कलंकित कर गई ये घटनाएं

Wed, 25 Dec 2013 05:22 PM IST
अमर उजाला, देहरादून
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उत्तराखंड में बीतने वाले साल में कई ऐसी घटनाएं हुईं जो त्रासदीपूर्ण होने के साथ ही शर्मनाक और अमानवीय भी हैं। इन घटनाओं ने शासन, प्रशासन, पुलिस और समाज तक की कलई खोल कर रख दी।
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मानवीयता और संवेदना पर सवाल
कई नामी चरित्र कलंकित हुए तो व्यवस्था तार-तार होती नजर आई। पुलिस की नाकामी ऐसी रही कि उसके लिए ऐतबार शब्द बेमानी होने लगा है। ये घटनाएं विश्वासघात की कथा हैं तो मानवीयता और संवेदना पर भी सवाल खड़े करती हैं।

यौन शोषण मामला : कई के चाल, चरित्र और चेहरे से पर्दा उठना बाकी
साल बीतने से पहले नौकरी का झांसा देकर एक युवती के यौन शोषण का मामला इस तरीके से सामने आया कि सचिवालय से लेकर सियासत, मीडिया और पुलिस तक को शर्मसार होना पड़ा।
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युवती ने अपर सचिव पर यौन शोषण का आरोप लगाते हुए 22 नवंबर को दिल्ली में जीरो एफआईआर दर्ज कराई। पुलिस पर आरोप लगाया कि वह उसकी मदद नहीं कर रही है। दूसरे दिन दून में आरोपी जेपी जोशी ने युवती और उसके कुछ साथियों पर ब्लैकमेलिंग का केस दर्ज कराया।

टीवी चैनलों ने स्टिंग करके मामले को और उलझाया। पुलिस ने जांच आगे बढ़ाई तो एक-एक करके कई किरदार जेल चले गए। जिसमें यूथ कांग्रेस की महासचिव रही रितु कंडियाल, सपा नेता नीरज चौहान, इलेक्ट्रानिक मीडिया से जुड़े संजय बनर्जी, शाईनी मैक और अमित गर्ग गिरफ्तार हो चुके हैं।

अपर सचिव जेपी जोशी और संयुक्त सचिव सुमन सिंह वल्दिया भी जेल में हैं। जोशी पर आरोप लगाने वाली युवती भी जेल में है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।

गोली चला विधायक बने चैंपियन
17 सितंबर को विधानसभा सत्र शुरू होने से एक दिन पहले कृषि मंत्री हरक सिंह रावत के घर पर आयोजित डिनर पार्टी में ‘माननीयों’ के सामने गोलियां चली।

इसमें कांग्रेस नेता विवेकानंद खंडूड़ी और हरिद्वार के एक अन्य कांग्रेसी नेता घायल हो गए। गोली चलाने में खानपुर से कांग्रेस विधायक कुंवर प्रणव चैंपियन का नाम सामने आया।

पार्टी में मंत्रियों और विधायकों की मौजूदगी के बावजूद गोलीकांड पर किसी ने मुंह नहीं खोला। खुद विवेकानंद ही चुप रहे। बाद में विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल ने चैंपियन के गोली चलाने की बात कही।

इसके बाद चैंपियन ने कैंट थाने में सरेंडर करके तुरंत ही जमानत ले ली। मामले की काफी चर्चा रही लेकिन चैंपियन के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई।

युद्धवीर हत्याकांड : एडमीशन में दलाली की कालिख
कृषि एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री हरक सिंह रावत के पूर्व पीए युद्धवीर सिंह की हत्या से एमबीबीएस सहित उच्च शिक्षा में दाखिले के लिए दलाली कालिक सतह पर आ गई। एमबीबीएस में एडमीशन की रकम के विवाद में बदमाशों ने 10 अगस्त को युद्धवीर की हत्या कर दी।

साजिश में सुधा पटवाल नाम की महिला को गिरफ्तार किया गया। मैनेजमेंट कोटे की सीट पर हिमाचल की छात्रा के दाखिले के लिए सुधा और उसके साथियों ने 14 लाख की रकम ली थी, लेकिन जब एडमीशन नहीं हो पाया तो युद्धवीर की हत्या कर दी गई।

मामले में पुलिस ने सुधा, हरिओम वशिष्ठ, उमेश, संजीव उर्फ संजू और अन्य आरोपियों को गिरफ्तार करके जेल भेज दिया है।

बदमाशों से मात खाती रही पुलिस
29 अक्तूबर को नेशविला रोड पर झगड़े की सूचना पर पहुंचे चीता फोर्स के सिपाहियों अंगेश्वर और अनुज को राजू बॉक्सर नाम के बदमाश ने चाकू से लहूलुहान कर दिया।

पुलिस और एसओजी ने राजू बॉक्सर निवासी चुक्खुवाला की तलाश में यूपी और उत्तराखंड में कई जगह दबिश दी। मामले में तत्कालीन कोतवाल जयमल नेगी को हटना भी पड़ा। लेकिन पुलिस अभी तक बॉक्सर का पता नहीं लग पाया है।

राजेश और नीरू हत्याकांड फाइलों में बंद
आईजी रामसिंह  मीणा के रिश्तेदार और पूर्व जिला होम्योपैथी अधिकारी डॉ. जेपी शर्मा की पत्नी राजेश शर्मा (70) की 7 सितंबर को दिनदहाड़े उनके घर में ही हत्या कर दी गई। मामले में अभी तक पुलिस एक भी आरोपी को नहीं पकड़ पाई है।

राजेश हत्याकांड में पुलिस किसी नतीजे पर पहुंचती कि 10 सितंबर को बदमाशों ने दिनदहाड़े तेगबहादुर रोड स्थित पॉश एरिया में ठेकेदार सतेंद्र सैनी की पत्नी नीरू सैनी (40) की हत्या कर दी। पुलिस अब तक नीरू के हत्यारों को नहीं पकड़ पाई है।

गर्भवती की सिर कटी लाश से सनसनी
13 नवंबर को राजभवन और सीएम आवास के समीप सैन्य एरिया में एक युवती की लाश नग्न हालत में बोरे में मिलने से सनसनी फैल गई। हत्यारों ने शिनाख्त छुपाने के लिए युवती का सिर और कपड़े गायब कर दिए थे।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में युवती केगर्भवती होने की पुष्टि हुई। इस घटना का भी अभी तक खुलासा नहीं हो पाया है। न तो हत्यारे पकड़े गए और न ही युवती की ही शिनाख्त हो पाई है।

न पेड़ के हत्यारे पकड़े गए न नत्थूराम सामने आया
राजपुर के वीरगिरवाली गांव में आरक्षित जंगल की जमीन की रजिस्ट्री कराने और उस पर साल के 25 हरे पेड़ काटने का मामला काफी दिनों तक सुर्खियों में रहा। पुलिस के एक आला अधिकारी के नाम जमीन रजिस्ट्री कराने की बात भी सामने आई थी।

पेड़ कटा तो यह भी खुलासा हुई कि जमीन की रजिस्ट्री ही फर्जी है। किसी नत्थूराम का नाम उछला जो आज तक सामने नहीं आया। प्रकरण की पुलिस और जंगलात महकमे के स्तर पर जांचें कराई गईं, लेकिन दोनों ही जांचों को दबा दिया गया।

जंगलात महकमे के एक्टिव होने पर जमीन कागजों में तो वन विभाग के नाम दर्ज हो गई है, लेकिन इस संबंध में आज भी मुकदमा विभिन्न न्यायालयों में चल रहा है।

पहले आया मानसून और दहला गया
इस साल मानसून दून में करीब 15 दिन पहले आया और दहला गया। पहाड़ पर जलप्रलय तो आई ही दून भी इससे अछूता नहीं रहा। 16 जून की रात ऐसी बारिश हुई कि उसने प्रेमनगर निवासी कन्हैया (30) के परिवार को मौत की आगोश में डाल दिया।

पति-पत्नी सहित दो बच्चे सदा के लिए इस दुनिया से चले गए। इस घटना के पांच दिन बाद ही प्रकृति ने फिर क्रूर रूप दिखाया। इस बार उसका कहर राजपुर स्थित काठ बंगला बस्ती पर गिरा। यहां मिट्टी के ढांग के नीचे दबकर घर में सो रहे तीन बच्चों समेत पति-पत्नी दबकर मर गए।
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