सामूहिक बीमा : राज्य कर्मचारी सामूहिक बीमा योजना एवं बचत योजना में बीमा कवर पांच गुना बढ़ाया गया। इसके साथ ही कर्मियों से प्रति माह ली जाने वाली प्रीमियम की दरें भी बढ़ाई गई। 2,800 ग्रेड वेतन पर 350 रुपये प्रीमियम और पांच लाख रुपये बीमा कवर होगा। 2,800-5,400 ग्रेड वेतन पर 700 रुपये प्रीमियम और 10 लाख बीमा कवर, 5400 से ऊपर के ग्रेड वेतन श्रेणी में आने वाले कर्मचारियों व अधिकारियों से 1400 रुपये प्रीमियम और 20 लाख बीमा कवर तय किया गया। सामूहिक बीमा योजना में बीमा कवर बढ़ाने से लगभग डेढ़ लाख से अधिक कर्मचारियों व अधिकारियों को लाभ मिलेगा।
पुरानी पेंशन : ऐसे कर्मचारी जिनकी भर्ती की विज्ञप्ति एक अक्तूबर 2005 से पहले प्रकाशित हुई होगी, उन्हें सरकार ने इसी साल से पुरानी पेंशन का लाभ देने का निर्णय लिया। इसके लिए विभागवार जानकारी मांगी गई है। अभी तक इन कर्मचारियों को नई पेंशन योजना का लाभ मिल रहा था।
नए साल में इन मांगों के लिए जद्दोजहद रहेगी जारी
गोल्डन कार्ड : गोल्डन कार्ड योजना के तहत कैशलेस ओपीडी की मांग अधूरी ही रह गई। वहीं, पेंशनरों को एक बार फिर गोल्डन कार्ड योजना चुनने का विकल्प देने की मांग पर भी कोई काम नहीं हो पाया। सालभर तमाम संगठनों ने विरोध-प्रदर्शन किए। मंत्री ने समिति गठित की, जिसने रिपोर्ट भी दी। बावजूद इसके ये मांग पूरी नहीं हो पाई। कर्मचारी संगठन अभी भी इसके लिए मुखर हैं।
पदोन्नत वेतनमान : यह मांग वैसे तो लंबे समय से उठ रही है, लेकिन साल 2023 में प्रमुखता से उठी। बावजूद इसके इस पर कोई निर्णय नहीं हुआ। कर्मियों की मांग है कि 10, 16, 26 साल की सेवा पर पदोन्नत वेतनमान का लाभ दिया जाए। नए साल में भी यह मांग प्रमुखता से उठ सकती है।
पुरानी पेंशन : पुरानी पेंशन बहाली की मांग को लेकर पुरानी पेंशन बहाली राष्ट्रीय आंदोलन और राष्ट्रीय पुरानी पेंशन बहाल संयुक्त मोर्चा लगातार संघर्षरत है। दोनों संगठनों ने बड़े पैमाने पर सालभर प्रदर्शन, रैलियां कीं। नए साल में भी दोनों संगठन इस मांग को उठाने को प्रतिबद्ध हैं।
वेतन विसंगति समिति रिपोर्ट : वेतन विसंगति समिति ने अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप दी थी। बावजूद इसके कर्मचारी संगठनों की इसे सार्वजनिक करने की मांग इस साल में अधूरी रह गई।
समान सेवा नियमावली : विभिन्न विभागों की समान सेवा नियमावली की मांग भी अधूरी रह गई है। संगठन नए साल में इसे जोर-शोर से उठाने की तैयारी में हैं।
यात्रा देय व एलटीसी की नियमावली : इस नियमावली में संशोधन की मांग अधूरी है। नए साल में इसके पूरा होने का इंतजार है।