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सावधान आपदा के निशाने पर है एक और धाम

Wed, 01 Jan 2014 10:43 AM IST
अमर उजाला, बड़कोट (उत्तरकाशी)
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उत्तराखंड के प्रसिद्घ धाम यमुनोत्री की सुरक्षा को लेकर सिंचाई विभाग की ओर से हाथ खड़े करने के बाद तबाही की आशंका और बढ़ने लगी है।
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यमुना नदी और कालिंदी पर्वत से खतरा बरकरार
हालांकि धाम की सुरक्षा के नाम पर पिछले सात सालों में एक करोड़ से ज्यादा खर्च हो गया है, लेकिन लीपापोती और निम्न गुणवत्ता के कार्यों के चलते धाम को यमुना नदी और कालिंदी पर्वत से खतरा बरकरार है।

विश्व विख्यात यमुनोत्री धाम वर्षों से आपदा के कहर से जूझ रहा है। वर्ष 2004 में कालिंदी पर्वत दरकने से इस धाम में छह लोगों की मौत हुई थी और मंदिर एवं परिसर को भारी नुकसान हुआ।
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वर्ष 2007 में यमुना के मुहाने पर झील बनने तथा वर्ष 2010 में नदी के कटाव से भी नुकसान हुआ। इस बीच मंदिर की सुरक्षा पर लाखों रुपए खर्च किए गए, लेकिन लीपापोती तथा घटिया गुणवत्ता के कार्यों के कारण मंदिर सुरक्षित नहीं हो पाया।

यही कारण रहा कि जून 2013 में फिर से कालिंदी पर्वत से पत्थर गिरने से मंदिर को नुकसान पहुंचा और परिसर यमुना नदी के कटाव की जद में आ गया।

इस दौरान भू-वैज्ञानिकों ने धाम का सर्वेक्षण कर मंदिर की सुरक्षा को लेकर प्रशासन को रिपोर्ट सौंपी, जिसमें वैज्ञानिकों ने यमुना के कटाव से बचाव के लिए नदी से मलबा हटाने, पूर्वी तट पर सीसी पिलर्स का निर्माण करने तथा कालिंदी पर्वत से भूस्खलन रोकने के लिए रॉक बोल्डिंग के साथ ही टेसाइल वायरनेट लगाने के सुझाव दिए थे।

भू-वैज्ञानिकों के अनुसार काम करना संभव नहीं
रिपोर्ट में भू-वैज्ञानिकों ने जिन भारी मशीनों से काम करने का सुझाव दिया है। वह मशीनें धाम तक पहुंचानी संभव नहीं है। बड़े बोल्डरों को ब्लास्टिंग से तोड़ना खतरे से खाली नहीं है। ऐसे में सिर्फ मंदिर की सुरक्षा के लिए यमुना का जल प्रवाह दूसरी ओर किया जा सकता है।
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- हिमांशु घिल्डियाल, एई सिंचाई विभाग

यमुनोत्री धाम की सुरक्षा भू-वैज्ञानिकों की ओर से दिए गए सुझाव के अनुसार होनी चाहिए। सिंचाई विभाग बजट को ठिकाने लगाने के अंदाज में हर साल घटिया काम कर रहा है। इसलिए सुरक्षा कार्य किसी अनुभवी ऐजेंसी करवाए जाए।
- खिलानंद उनियाल, सचिव यमुनोत्री मंदिर समिति
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