प्रदेश के कुल भौगोलिक क्षेत्र 53,483 वर्ग किलोमीटर में से लगभग 24,295 वर्ग किलोमीटर (45.43 प्रतिशत) वन एवं 3,550 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में लगभग 917 हिमनद हैं। जहां से उत्तर भारत की प्रमुख बारहमासी नदियों का उद्गम होता है। राज्य में औसतन 1,495 मिलीमीटर (मिमी) पानी बरसता है।
हालांकि इसमें सबसे बड़ी असमानता यह है कि ज्यादातर पानी 100 दिन में ही बरसता है, जो कि तेज ढलानों में तेजी से बह भी जाता है। राज्य में उपलब्ध कुल 2.27 बिलियन घनमीटर वार्षिक पुन: पूर्ति योग्य भूजल संसाधन में शुद्ध वार्षिक भूमिगत जल की उपलब्धता मात्र 2.10 बिलियन घनमीटर है।
66 प्रतिशत समग्र भूजल विकास के दृष्टिगत सिंचाई व घरेलू तथा औद्योगिक प्रयोजन हेतु वार्षिक भूजल-दोहन क्रमश: 1.34 बिलियन घनमीटर तथा 0.05 बिलियन घनमीटर अनुमानित किया गया है।
आज डीएम और प्रधानों से बात करेंगे पीएम मोदी
विश्व जल दिवस पर सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जल शक्ति अभियान कैच द रेन की शुरुआत करेंगे। इसके तहत वह सभी जिलों के जिलाधिकारियों और ग्राम प्रधानों, सरपंचों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से संबोधित करेंगे। आगामी मानसून सीजन के तहत सभी जल निकायों की मैपिंग की जाएगी। इसका मकसद वर्षा जल संरक्षण और भूजल रिचार्ज को लेकर बड़े स्तर पर काम करना है ताकि पानी की किल्लत पर काबू पाया जा सके।
पहाड़ में पानी के स्रोत लगातार सूख रहे हैं। ऐसे में स्रोतों का पुनर्जीविकरण करने के साथ ही किल्लत वाले स्थानों तक हम प्राथमिकता से पानी उपलब्ध कराने जा रहे हैं।
-बिशन सिंह चुफाल, पेयजल मंत्री
पहाड़ के तीन जिलों में पानी की कमी को दूर करने के लिए विशेष योजना बनाई जा रही है। उम्मीद है कि आने वाले समय में इस समस्या से निजात पा ली जाएगी।
- एसके पंत, एमडी, पेयजल निगम