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World Water Day 2021: उत्तराखंड में 50 प्रतिशत जल स्रोत सूखे, पानी देने वाला पहाड़ ही प्यासा

Mon, 22 Mar 2021 11:37 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal आफताब अजमत, अमर उजाला, देहरादून
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विश्व जल दिवस 2021 : पानी की किल्लत - फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो
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प्रदेश भारी पेयजल किल्लत की ओर बढ़ रहा है। बारिश कम होने की वजह से कई जिलों में अभी से पानी कि कमी होनी शुरू हो गई है। देश के तमाम राज्यों को पानी देने वाले उत्तराखंड के ही कई इलाके प्यासे रहने के कगार पर हैं। 50 प्रतिशत जल स्रोत सूख चुके हैं। ऐसे में सरकार की कोशिश इस सीजन में पेयजल उपलब्धता मजबूत करने की है।

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जल दिवसः देहरादून शहर में प्रति व्यक्ति 100 तो गांव में 50 लीटर पानी हो रहा उपलब्ध

तीन पर्वतीय जिलों में सबसे ज्यादा पेयजल संकट

पेयजल निगम के आंकड़ों पर गौर करें तो प्रदेश के तीन पर्वतीय जिलों में सबसे ज्यादा पेयजल की किल्लत है। पौड़ी में हर साल की तरह इस साल भी पानी की उपलब्धता सरकार के लिए चुनौती बनी हुई है। टिहरी के भी कई इलाकों में पानी की किल्लत शुरू हो गई है। जबकि अल्मोड़ा के सल्ट, भिखियासैंण सहित कई क्षेत्रों में पेयजल की भारी कमी होने लगी है। इन सभी जिलों में पेयजल आपूर्ति के विशेष प्रयास किए जा रहे हैं।
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सूख गए 50 प्रतिशत जल स्रोत

पर्वतीय क्षेत्र में नौले (भूमिगत जल एकत्र करने के लिए पत्थर की सीढ़ीनुमा दीवारों वाले 1-2 मीटर गहरे चौकोर गड्ढे) एवं धारे (चट्टान से धारा के रूम में जल प्रवाह) अनादि काल से पेयजल के स्रोत रहे हैं। दुर्भाग्यवश हाल के दशकों में लगभग 50 प्रतिशत जलस्रोत या तो सूख गए हैं या उनका जल प्रवाह कम हो गया है।

जनसंख्या बहुल क्षेत्रों में तो गर्मियों में जल एकत्र करने के लिए लंबी कतारें एवं कुछ इलाकों में महिलाओं एवं बच्चों द्वारा 2 किलोमीटर से भी अधिक दूर स्रोतों से जल लाना एक सामान्य बात है। कुछ पहाड़ी कस्बों में तो गर्मियों में प्रति घर लगभग 25-50 रुपये मजदूरी में लगभग 20-25 लीटर पेयजल दूर क्षेत्रों से मंगाया जाता है।

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प्रदेश में 917 हिमनद

प्रदेश के कुल भौगोलिक क्षेत्र 53,483 वर्ग किलोमीटर में से लगभग 24,295 वर्ग किलोमीटर (45.43 प्रतिशत) वन एवं 3,550 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में लगभग 917 हिमनद हैं। जहां से उत्तर भारत की प्रमुख बारहमासी नदियों का उद्गम होता है। राज्य में औसतन 1,495 मिलीमीटर (मिमी) पानी बरसता है।

हालांकि इसमें सबसे बड़ी असमानता यह है कि ज्यादातर पानी 100 दिन में ही बरसता है, जो कि तेज ढलानों में तेजी से बह भी जाता है। राज्य में उपलब्ध कुल 2.27 बिलियन घनमीटर वार्षिक पुन: पूर्ति योग्य भूजल संसाधन में शुद्ध वार्षिक भूमिगत जल की उपलब्धता मात्र 2.10 बिलियन घनमीटर है।

66 प्रतिशत समग्र भूजल विकास के दृष्टिगत सिंचाई व घरेलू तथा औद्योगिक प्रयोजन हेतु वार्षिक भूजल-दोहन क्रमश: 1.34 बिलियन घनमीटर तथा 0.05 बिलियन घनमीटर अनुमानित किया गया है।

आज डीएम और प्रधानों से बात करेंगे पीएम मोदी

विश्व जल दिवस पर सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जल शक्ति अभियान कैच द रेन की शुरुआत करेंगे। इसके तहत वह सभी जिलों के जिलाधिकारियों और ग्राम प्रधानों, सरपंचों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से संबोधित करेंगे। आगामी मानसून सीजन के तहत सभी जल निकायों की मैपिंग की जाएगी। इसका मकसद वर्षा जल संरक्षण और भूजल रिचार्ज को लेकर बड़े स्तर पर काम करना है ताकि पानी की किल्लत पर काबू पाया जा सके।

पहाड़ में पानी के स्रोत लगातार सूख रहे हैं। ऐसे में स्रोतों का पुनर्जीविकरण करने के साथ ही किल्लत वाले स्थानों तक हम प्राथमिकता से पानी उपलब्ध कराने जा रहे हैं।
-बिशन सिंह चुफाल, पेयजल मंत्री 

पहाड़ के तीन जिलों में पानी की कमी को दूर करने के लिए विशेष योजना बनाई जा रही है। उम्मीद है कि आने वाले समय में इस समस्या से निजात पा ली जाएगी।
- एसके पंत, एमडी, पेयजल निगम 
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