आशाहीन, निराशाजनक एवं अकेलेपन की बातें करना, कहना कि उनके पास जीवित रहने का कोई कारण नहीं है या समस्याओं से बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं है।
अपनी वसीयत बनाना या व्यक्तिगत संपत्ति, वस्तुओं को किसी को दे देना, खुद को नुकसान पहुंचाने के साधनों की खोज करना, बहुत अधिक या बहुत कम सोना, कम खाना या बहुत अधिक खाना, अत्यधिक शराब या नशीली दवाओं के सेवन सहित लापरवाही बरतना, सामाजिक संपर्क से बचना, क्रोध या बदला लेने के इरादे को व्यक्त करना, अत्यधिक चिंता या व्याकुलता दर्शाना, मूड में नाटकीयता रहना, दोस्तों और परिवार को अलविदा इत्यादि शब्द कहना, मरने की इच्छा व्यक्त करना, बहुत ज्यादा अपराधबोध और शर्म महसूस करना।
साइकोलोजिस्ट डॉ. मालिनी श्रीवास्तव ने बताया कि जिस व्यक्ति के मन में आत्महत्या करने जैसे विचार आए तो इसमें बिना देरी किए उसे मनोचिकित्सक की मदद लेनी चाहिए।