पिछले दस सालों में ग्लेशियरों के पीछे खिसकने की गति कम हुई है। जीबी पंत हिमालय पर्यावरण एवं विकास संस्थान के वैज्ञानिकों के अध्ययन के मुताबिक करीब दस साल पहले कुमाऊं का प्रसिद्ध मिलम ग्लेशियर 18 मीटर प्रति वर्ष की गति से पीछे खिसक रहा था, लेकिन अब यह गति घटकर नौ मीटर प्रति वर्ष पहुंच गई है।
इसी तरह प्रसिद्ध गंगोत्री ग्लेशियर के पीछे खिसकने की गति में भी कमी आई है। वैज्ञानिक इसे पर्यावरण की दृष्टि से अच्छा संकेत मान रहे हैं।
कुमाऊं के पिथौरागढ़ जिले में स्थित मिलम ग्लेशियर कुछ साल पहले तक तेजी से पीछे खिसक रहा था। जीबी पंत हिमालय पर्यावरण एवं विकास संस्थान के वैज्ञानिक पिछले कई सालों से इस ग्लेशियर की स्थिति के बारे में अध्ययन कर रहे हैं।
वैज्ञानिकों के दल का नेतृत्व कर रहे वरिष्ठ वैज्ञानिक किरीट कुमार के मुताबिक वर्ष 2000 के बाद दो-तीन वर्षों के दौरान मिलम ग्लेशियर के पीछे खिसकने की गति 18 मीटर प्रति वर्ष तक रिकॉर्ड की गई थी, लेकिन पिछले दो-तीन सालों में यह गति कम होकर नौ मीटर प्रति वर्ष तक आ गई है।