दुनिया के कई हिस्सों में दिवाली का पर्व किसी न किसी रूप में मनाया जाता है। इसी दिन अन्य देशों में मिलते-जुलते त्योहार मनाने को सिर्फ संयोग नहीं माना जा सकता।
यह बात प्रवासी भारतीयों की नहीं बल्कि उन देशों की मूल परंपराओं से जुड़ी है। चीन में यह महीना सफाई के लिए नियत है। घरों के द्वार पर चीनी भाषा में ‘शुभ-लाभ’ लिख पुर्वजों की स्मृति में दीप जलाए जाते हैं।
हमारी अमावस्या के दिन चीन में दिवारात होती है। इस रात में सर्वत्र रोशनी की जाती है। मॉरिशस और नेपाल में तो दीपावली हमारे देश की तरह ही मनाई जाती है, किंतु यहां नववधुएं दीप जलाती हैं। थाईलैंड में दिवाली को क्रायोग कहा जाता है। केले के पत्ते से बने पात्र में दीप प्रज्ज्वलित कर नदी अथवा समुद्र में बहाए जाते हैं।
जापान में इस दिन झाड़ू नहीं लगती और तीन दिनों तक घरों को धोया जाता है। मान्यता है कि झाड़ू लगाने से धन की देवी नाराज हो जाती हैं।