कर्फ्यू के बावजूद दुकानों पर मात्र साइकिलों की ही 20 से 25 फीसदी तक खरीदारी बढ़ी है। पिछले लॉकडाउन में अन्य महीनों की अपेक्षा कोरोना काल में 20 फीसदी साइकिल की सेल बढ़ गई थी। इस बार भी क्रेज बरकरार है। संजय गांधी कॉलोनी निवासी मंजीत रावत बताते हैं कि संक्रमण के इस दौर में वह प्रतिदिन एक घंटे का समय दे रहे हैं। शेरपुर निवासी सोमवाल सैनी ने बताया कि पहले उन्होंने एक मित्र की साइकिल से कुछ दिन सैर की। इसके बाद अपनी साइकिल खरीद ली है। पीडी जैन साइकिल शॉप के मालिक आकाश जैन ने बताया कि लोग अपनी सेहत के ख्याल से साइकिल ही खरीद रहे हैं। वहीं नाम न छापने की शर्त पर एक दुकानदार ने बताया कि उनकी दुकान से हर महीने 70 से 80 साइकिलों की ब्रिकी हो रही है। जबकि पिछले सालों में यह ब्रिकी 20 से 25 तक ही सीमित थी।
साइकिल ट्रैक से महरूम हुए शहरवासी
साइकिलिंग के लिए सबसे बेहतर जगह मानी जाने वाली गंगनहर पटरी से भी शहरवासी महरूम हो गए हैं। सुबह की सैर और साइकिलिंग के लिए लोगों के लिए कोई स्पेशल ट्रैक नहीं बनाया गया है। ऐसे में सबसे बेहतर विकल्प गंगनहर पटरी था। बरसों से यहां पूरे शहर के लोग सुबह ही अपने वाहनों से पहुंचकर गंगनहर पटरी पर सुबह की सैर करते थे। साथ ही साइकिलिंग करते हुए गंगनहर पुल से मेहवड़ व कलियर और आसफनगर झाल तक सैर करते थे। पटरी के चौड़ीकरण से वाहन बढ़े तो यह ट्रैक भी साइकिलिंग के लिए महफूज नहीं रहा।
रोजाना 15 किमी साइकिल चलाते हैं मे.ज. नवीन कुमार
सेवानिवृत्त मेजर जनरल नवीन कुमार ऐरी रोजाना करीब 15 किमी साइकिल चलाते हैं। इसके जरिए वह आमजन को सेहतमंद रहने का संदेश दे रहे हैं। देहरादून के बसंत विहार निवासी ऐरी के अनुसार गर्मी, ठंड या फिर बरसात किसी भी मौसम में वह साइक्लिंग करना नहीं छोड़ते। यहां तक की घर का छोटा-मोटा सामान लेने के लिए भी वो गाड़ी के बजाय साइकिल से जाना ही पसंद करते हैं। उनका मानना है कि अमेरिका, फ्रांस, इटली, चीन, जर्मनी कनाडा जैसे विकसित देशों में साइकिल चलाने का चलन बहुत अधिक है, जबकि अपने देश में इसके प्रति लोगों का नजरिया सही नहीं है। कोरोना काल के दौरान धीरे-धीरे इस सोच में बदलाव आ रहा है।