कोरोनाकाल के बाद बढ़ी संक्रमण दर
साल 2015-16 में हुईं 179592 जांचों में एचआईवी की संक्रमण दर 0.46 प्रतिशत थी जो साल 2020-21 में 315740 जांचों में घटकर 0.19 प्रतिशत रह गई थी। कोरोनाकाल शुरू होने के साथ ही एचआईवी जांच में संक्रमण दर बढ़ने लगी। साल 2021-22 में हुई 353566 एचआईवी जांचों में ये बढ़कर 0 ़25 प्रतिशत और साल 2022 में अप्रैल से अक्तूबर के दौरान हुई 290015 जांचों में 0.25 प्रतिशत दर्ज की गई है। वर्तमान में उत्तराखंड में एस्टीमेट एडल्ट एचआईवी प्रिवेलेंस (15-49 साल) संक्रमण दर 0.12 (स्रोत-टेक्निकल रिपोर्ट-2021, एनएसीओ) प्रतिशत है।
5580 रोगी ले रहे हैं केयर सपोर्ट ट्रीटमेंट
एचआईवी संक्रमित लोगों की देखभाल, सहायता एवं चिकित्सा और उपचार में स्वास्थ्य विभाग मदद करता है। राज्य में कुल सात एआरटी सेंटर हैं। जहां वर्तमान में कुल 5580 एचआईवी संक्रमित मरीजों को एंटी रेट्रो वायरल दवाएं नि:शुल्क दी जा रहीं हैं। इन दवाओं से रोगी की आयु बढ़ जाती है। हालांकि उसे रोग मुक्त किया जाना संभव नहीं है। हल्द्वानी में राजकीय मेडिकल कॉलेज हल्द्वानी में एआरटी सेंटर है। (स्रोत-राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण कार्यक्रम, उत्तराखंड)
नैनीताल जिले में सात बच्चों में एचआईवी संक्रमण
नैनीताल जिले में सात बच्चों में एचआईवी संक्रमण पाया गया है। इनका उपचार एआरटी सेंटर हल्द्वानी से चल रहा है। जिला प्रोबेशनल कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार इन सभी बच्चों को विभाग में सूचीबद्ध किया गया है। इन बच्चों की देखरेख विभाग की ओर से भी की जा रही है। उल्लेखनीय है कि पिछले साल तक नैनीताल जिले में एचआईवी संक्रमित बच्चों की संख्या तीन ही थी। जो अब बढ़कर सात हो गई है।
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छिपाकर नहीं बताकर मिलेगा एड्स से छुटकारा
एचआईवी संक्रमित मरीजों को राज्य में मौजूद एआरटी सेंटरों से नि:शुल्क दवाएं दी जा रहीं हैं। साथ ही एचआईवी से बचने को लेकर जागरूकता अभियान भी समय-समय पर चलाया जाता है। पीड़ितों को चाहिए कि एड्स के लक्षण मिलने पर तत्काल विशेषज्ञ चिकित्सकों से संपर्क करें। बीमारी को छिपाए नहीं, बल्कि समय पर उपचार कराएं।
-डॉ. शैलजा भट्ट, स्वास्थ्य महानिदेशक, उत्तराखंड।