प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की घोषणा के बावजूद मेरठ उत्तर प्रदेश के एक अस्पताल ने मृतक कड़च्छ ज्वालापुर निवासी एवं नगर निगम के सेवानिवृत्त कर्मचारी मनीराम के परिजनों से 500-500 रुपये के नोट नहीं लिए। अस्पताल से पति का शव छुड़ाने के लिए पत्नी शकुंतला को अपना मंगल सूत्र और अंगूठी बतौर जमानत देनी पड़ी।
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श्मशानघाट कनखनल में अंतिम संस्कार किया गया
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अंतिम संस्कार
- फोटो : AmarUjala
ज्वालापर के भाजपा नेता और पार्षद लकेष्मी देवी के पति श्यामल दबोड़िया ने बताया कि मनीराम को छोटी दिवाली को ब्रेन हेमरेज को गया था। उपचार के लिए परिजन मेरठ के निजी अस्पताल में ले गए थे, जहां उनकी मृत्यु हो गई।
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rupee
अस्पताल ने परिजनों को 20 हजार रुपये का बिल थमाया। उनके पास 500-500 रुपये के ही नोट थे, जिन्हें लेने के लिए अस्पताल ने साफ मना कर दिया।
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डेमो
- फोटो : demo pic
पुलिस भी आई फिर भी अस्पताल ने शव नहीं दिया। मनीराम की मजबूर पत्नी शकुंतला को फिर अपने पति का शव लेने के लिए अस्पातल में मंगल सूत्र और हाथ अंगुठी देनी पड़ी।
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cremation
मनीराम का शनिवार को श्मशानघाट कनखनल में अंतिम संस्कार किया गया। म्युनिस्पिल बोर्ड कर्मचारी यूनियन के पदाधिकारियों ने रविवार को मायापुर यूनियन भवन में शोकसभा का आयोजन किया।
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श्रमिक नेता मुरली मनोहर ने श्रद्धांजलि देते हुए उत्तर प्रदेश सरकार को मेरठ के अस्पताल के विरूद्ध कार्यवाही करने और मृतक मनीराम की पत्नी का मंगल सूत्र व अंगूठी वापस दिलाने की मांग की।
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2000 rupee note
श्रमिक नेता मुकुल जोशी ने नगर निगम प्रशासन की आलोचना करते हुए कहा कि मनीराम की ग्रेच्युटी, एरियर तथा छह महीने की पेंशन का लगभग 10 लाख रुपये बकाया है।