भारत को विकास की राह पर तेजी से बढ़ना है तो उसे महिलाओं के लिए गढ़ी गई सामाजिक बेड़ियों को तोड़ना होगा। महिलाओं को समान अधिकार और अवसर देने होंगे।
ऐसा हो गया तो फिर इस देश को दुनिया में खास पहचान हासिल करने से कोई रोक नहीं सकेगा। चीन भी महिलाओं के योगदान से ही आगे बढ़ा है। यह कहना है चीन से आए संस्कृतविद् डॉ. गंगाप्रसाद शर्मा का।
चीन की तरह हटानी होंगी बेड़ियां
अंतरराष्ट्रीय संस्कृत सम्मेलन में डा. शर्मा ने कहा कि जिस भी देश या समाज में महिलाओं की उपेक्षा की गई, वहां की तरक्की रुक गई। कहा कि चीन में महिलाओं के अधिकारों पर पहले बेड़ियां रहती थीं लेकिन इन्हें हटाते ही आज देश दुनिया की बड़ी ताकत बनकर उभरा है।
कहा कि भारत को भी महिलाओं के लिए खींची गई लक्ष्मण रेखाएं तोड़ने होंगी। उन्होंने कहा कि महिलाओं को वेद ज्ञान दिया जाए तो न सिर्फ संस्कृत बढ़ेगी, बल्कि भारत भी निरंतर उन्नति की ओर अग्रसर होगा।
संस्कृत चैनल की उठी मांग
इस दौरान पूर्व मंत्री दीपा कौल ने आधुनिक संचार माध्यमों के उपयोग पर जोर देते हुए संस्कृत चैनल की वकालत की। बांग्लादेश की लुबना मंगलयन ने कहा कि संस्कृत के ज्ञान-विज्ञान को समझने की जरूरत है। औरंगाबाद की डॉ. मंजुला शाह कुलकर्णी ने कहा कि संस्कृत सब भाषाओं की राजमाता है।
गुरुकुल कांगड़ी विवि के पूर्व उपकुलपति प्रो. वेदप्रकाश ने कहा कि संस्कृत सिर्फ पंडागीरी नहीं है। उन्होंने गणित, विज्ञान, भौतिकी, रसायन आदि विषयों को वैदिक संस्कृत से जोड़कर पाठ्यक्रम में शामिल करने की जरूरत जताई।
विद्वानों ने रखे विचार
श्री जगन्नाथ पुरी संस्कृत विवि के कुलपति प्रो. हरिकृष्ण सत्पथी, प्रो. श्रीनिवास वरखेड़ी, डा. नंदिता शास्त्री, रजनीश शुक्ल ने भी विचार रखे।
समारोह का संचालन संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. महावीर अग्रवाल ने किया। इस अवसर पर लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष डॉ. डीपी जोशी, सदस्य डॉ. छाया शुक्ला, प्रो. वीके जैन, प्रो. एचएस धामी, प्रो. यूएस रावत समेत विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपति और अफसर मौजूद रहे।