राजधानी दून में लापरवाही का एक बड़ा मामला प्रकाश में आया है। ऊर्जा निगम की लापरवाही के चलते एक उपभोक्ता को हवालात की सैर करनी पड़ी।
ऊर्जा निगम की लापरवाही का खामियाजा एक उपभोक्ता को भुगतना पड़ा है। बार-बार गुहार के बावजूद उपभोक्ता का जला हुआ मीटर नहीं बदला गया।
जब उपभोक्ता ने स्वयं ही लाइन को डायरेक्ट जोड़ लिया तो विजिलेंस ने चोरी का मुकदमा दर्ज कर जेल भेज दिया। जमानत पर रिहा होने के बाद उपभोक्ता ने शिकायत निवारण मंच के समक्ष मामले को रखा।
6800 रुपये मुआवजा
इस पर मंच ने उपभोक्ता को 6800 रुपये मुआवजा दिलाया। श्यामपुर ऋषिकेश के गिरीश चंद्र रतूड़ी का मीटर 27 दिसंबर 2012 को शार्ट सर्किट के कारण जल गया था।
उपभोक्ता ने इसकी लिखित शिकायत 28 दिसंबर को की। मीटर बदलने के लिए 1200 रुपये की मांग की गई। इस पर उपभोक्ता ने उक्त राशि बिल के साथ जोड़कर भेजने के लिए कहा, लेकिन तब से लेकर दो मई 2013 तक मीटर नहीं बदला गया।
लाइन को डायरेक्ट जोड़ा
ऐसे में उपभोक्ता ने खुद ही लाइन को डायरेक्ट जोड़ लिया। तीन मई को विभागीय विजिलेंस टीम ने मौके पर छापा मारकर जांच की तो बिजली चोरी करते हुए पाया।
इस पर रतूड़ी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराकर जेल भेज दिया गया। जमानत कराकर जब जेल से रतूड़ी बाहर आए तो उपभोक्ता शिकायत निवारण मंच गढ़वाल से इस संबंध में शिकायत की।
136 दिन की क्षतिपूर्ति
तथ्यों की जांच के बाद मंच ने अपना फैसला सुनाया, जिसमें उपभोक्ता को अधिशासी अभियंता विद्युत वितरण खंड से 50 रुपये प्रति दिन के हिसाब से 136 दिन की क्षतिपूर्ति 6800 रुपये दिलाई गई।
यह रकम उपभोक्ता के बिलों में समायोजित करने का निर्देश दिया गया। दिसंबर 2012 से पहले उपभोक्ता नियमित तौर पर अपना बिल जमा करता आ रहा था।
स्थितियां पैदा कर रहे कर्मचारी
ऐसे में साफ है कि ऊर्जा निगम के अधिकारी और कर्मचारी उपभोक्ताओं को बिजली चोरी करने के लिए स्थितियां पैदा कर रहे हैं।
मंच के न्यायिक सदस्य एके कक्कड़, तकनीकी सदस्य आरएम अग्रवाल और उपभोक्ता सदस्य हिमांशु बहुगुणा की ओर से यह फैसला सुनाया गया है।