उत्तराखंड में कहीं भी बिना नक्शे के आवासीय और व्यावसायिक भवन नहीं बन सकेंगे।
भवन निर्माण से पहले उत्तराखंड आवास एवं नगर विकास प्राधिकरण (उडा) से नक्शा पास कराना होगा। आवासीय और व्यावसायिक सभी तरह के भवनों पर यह प्रावधान लागू होंगे। हालांकि, स्थानीय नागरिकों को आवासीय और व्यावसायिक भवनों में एक निर्धारित क्षेत्रफल तक नक्शा पास कराने से छूट होगी।
उडा के गठन के बाद प्रदेश के सभी छह प्राधिकरण और 21 विनियमित क्षेत्र इसके अधीन आ गये हैं। इसके अलावा प्रदेश का अन्य छूटा हिस्सा भी इसी प्राधिकरण के अधीन है। जिसके बाद प्राधिकरण को प्रदेश भर में भवनों के नक्शे पास करने और कार्रवाई का अधिकार मिला है। जिन क्षेत्रों में पहले से प्राधिकरण और विनियमित क्षेत्र है, वहां पूर्ववत ही व्यवस्था रहेगी।
प्राधिकरण के बोर्ड ने इसके नए प्रावधानों को मंजूरी दी है, जिन्हें गजट के लिए शासन को भेजा जा रहा है। नए प्रावधानों के अनुसार, प्रदेश से बाहर के लोगों को छोटे से छोटे आवासीय और व्यावसायिक निर्माण के लिए नक्शा पास करवाना होगा।
प्रदेश के स्थानीय नागरिकों को आवासीय भवनों में 200 वर्ग मीटर और व्यावसायिक भवनों में 20 वर्ग मीटर तक के निर्माण पर नक्शा पास करवाने से छूट होगी। सामुदायिक, शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन भवनों के लिए यह छूट 500 वर्ग मीटर तक अनुमन्य होगी। इससे अधिक क्षेत्रफल के प्रत्येक भवन निर्माण पर नक्शा पास कराने की अनिवार्यता होगी।
प्रावधानों के अनुसार, नजदीकी प्राधिकरण या विनियमित क्षेत्र ही संबंधित स्थल की निगरानी करेगा। ज्यादातर विनियमित क्षेत्रों में एसडीएम और सिटी मजिस्ट्रेट ही नियत प्राधिकारी होते हैं। इन्हें ही अपने-अपने क्षेत्रों के बड़े निर्माण की जानकारी देने के निर्देश जारी किए गए हैं।
बोर्ड ने नए प्रावधानों को मंजूरी दे दी है। जिन क्षेत्रों में प्राधिकरण प्राधिकारी नहीं हैं, वहां एसडीएम को नियत प्राधिकारी का काम दिया जा रहा है। इसके लिए निर्देश जारी किए जा रहे हैं। प्राधिकरण सभी स्थानों के निर्माण पर नजर रखेगा।
- एनएस रावत, अधीक्षण अभियंता, उडा
क्या पड़ेगा असर
अभी तक प्राधिकरण और विनियमित क्षेत्र से बाहर के इलाकों में निर्माण के लिए नक्शा पास कराने की अनिवार्यता नहीं है। नए प्रावधानों के लागू होने के बाद यहां भी नक्शे पास कराने होंगे। प्रदेश से बाहर के लोगों को हर निर्माण के लिए नक्शा पास कर अनुमति लेनी होगी। इससे तमाम पहाड़ी और दूरस्थ क्षेत्रों में हो रहे अनियोजित एवं अनियंत्रित निर्माण पर रोक लग सकेगी।