हालांकि संसदीय कार्यमंत्री प्रकाश पंत और मंत्री मदन कौशिक ने धरने पर बैठे विपक्ष को मनाने की भरपूर कोशिश की। विपक्ष की मांग पर दो पुलिस कर्मियों को लाइन हाजिर कर दिया गया, लेकिन दोपहर 1.10 बजे दूसरे दिन की कार्यवाही स्थगित होने के बाद भी धरना समाप्त नहीं किया गया। सदन की कार्यवाही समाप्त होने के बाद विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल ने विपक्ष के सदस्यों को वार्ता के लिए बुलाया।
संसदीय कार्यमंत्री प्रकाश पंत, नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदयेश, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल और प्रीतम सिंह के साथ बैठक बेनतीजा रही। विपक्ष दोनों पुलिस कर्मचारियों के निलंबन पर अड़ा रहा। आखिर शाम सवा चार बजे पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों और प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में पुलिस कर्मियों ने विधायक करन माहरा से माफी मांगी, जिसके बाद विपक्ष ने धरना समाप्त किया।
पटल पर रखे गए दो संशोधन विधेयक
बुधवार को तय समय पर सदन की कार्यवाही शुरू हुई। सरकार ने सदन के पटल पर उत्तराखंड (उत्तरप्रदेश जमींदारी विनाश एवं भूमि व्यवस्था अधिनियम 1950) (अनुकूलन एवं उपांतरण आदेश, 2001) संशोधन विधेयक 2018 और उत्तराखंड आयुर्वेद विवि (संशोधन) विधेयक, 2018 पेश किया। सदन में बुधवार को लोकसेवा आयोग की वर्ष 2017-2018 और सेवा का अधिकार आयोग की एटीआर समेत 2016-17 की वार्षिक रिपोर्ट भी प्रस्तुत की गई।