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बाहर मांस-मदिरा की दुकान अंदर दूध का 'हिसाब-किताब'

Wed, 09 Oct 2013 04:40 PM IST
नवीन सक्सेना/अमर उजाला, हल्द्वानी
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बाहर देसी शराब, मीट-मांस की दुकान और गेट के अंदर चल रहा है प्रदेश का डेयरी निदेशालय। इस स्थिति से अधिकारी ही नहीं कर्मचारी भी खासे परेशान हैं।
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अब डेयरी निदेशालय ने दफ्तर का स्थान बदलने के लिए तीनपानी स्थित उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय के सामने जंगलात की तीन एकड़ भूमि मांगी है। निदेशालय की ओर से प्रस्ताव वन विभाग के देहरादून नोडल अधिकारी को भेजा गया है।

गंदगी के कारण बदबू फैली
प्रदेश के डेयरी निदेशालय का दफ्तर मंगल पड़ाव पुलिस चौकी के पास ऐसी गली में है, जहां गली की शुरुआत से ही बकरे के मीट की दुकानों के अलावा खाने के होटल शुरू हो जाते हैं।
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कई दुकानें के आगे बढ़ने के बाद देसी शराब की बड़ी दुकान है और उसकी बाउंड्री से सटा हुआ है डेयरी निदेशालय। गली में घुसने से लेकर निदेशालय के दफ्तर परिसर तक में मीट-मांस की दुकानों और होटलों की वजह से गंदगी के कारण बदबू फैली रहती है।

निदेशालय का दफ्तर खोल दिया गया
बताते हैं कि वहां राज्य गठन से पूर्व लालकुआं दुग्ध संघ का दफ्तर चलता था, जो लालकुआं शिफ्ट हो चुका है। इसके बाद इसी भवन में डेयरी निदेशालय का दफ्तर खोल दिया गया।

वर्ष 2005-06 में निदेशालय के परिसर में ही उत्तराखंड सहकारी डेयरी फेडरेशन की बिल्डिंग का निर्माण कराया गया। निदेशालय में प्रबंध निदेशक (जो सीनियर पीसीएस अफसर होते हैं), उपनिदेशक समेत कई आला अफसर बैठते हैं, जबकि फेडरेशन के कार्यालय में उत्तराखंड सहकारी डेयरी फेडरेशन के चेयरमैन बैठते हैं।

सही स्थान पर ले जाने के प्रयास नहीं
प्रबंध निदेशक समय-समय पर बदलते रहे, मगर किसी ने निदेशालय दफ्तर को सही स्थान पर ले जाने के प्रयास नहीं किए। बताते हैं कि दुग्ध मंत्रालय मिलने के बाद कबीना मंत्री हरीश दुर्गापाल जब निदेशालय का दौरा करने पहुंचे तो सबसे पहले उन्होंने निदेशालय को यहां से हटाकर अपनी भूमि पर कार्यालय निर्माण कराने की कार्यवाही शुरू करने के निर्देश दिए। इसके बाद से ही निदेशालय के अफसर हरकत में आए।
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चेयरमैन का कहना
निदेशालय और फेडरेशन का कार्यालय अपनी भूमि पर नहीं है। लालकुआं दुग्ध संघ को इसका किराया दिया जाता है। जंगलात की भूमि हासिल करने के लिए शासन में प्रयास किए जा रहे हैं, जितनी भूमि जंगलात की ली जानी है, उतनी ही भूमि वन विभाग को देनी है, इसके लिए डेयरी की भूमि खोजी जा रही है।
- अर्जुन सिंह रौतेला, चेयरमैन, उत्तराखंड सहकारी डेयरी फेडरेशन
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