विलुप्त प्राय ग्रेट इंडियन बस्टर्ड, डॉल्फिन, समुद्री गाय और मणिपुरी हिरन की प्रजातियों को बचाने के लिए भारतीय वन्य जीव संस्थान अब ‘धाय मां’ की भूमिका निभाएगा। केंद्र सरकार ने वन्य जीवों की इन चार प्रजातियों को विलुप्त होने से बचाने की जिम्मेदारी संस्थान को दी है। इसके लिए सौ करोड़ रुपये बजट आवंटित किया गया।
16 राज्यों के वनाधिकारियों के साथ इस संबंध में रणनीति तैयार की गई है। इसके अलावा संस्थान विलुप्त वन्य जीवों के डीएनए सैंपल भी सुरक्षित करेगा।
वन्य जीवों की तेजी से विलुप्त हो रहीं प्रजातियों को बचाने का अभियान सोमवार को राष्ट्रीय स्तर पर लॉंच किया गया। पांच साल के केंद्र सरकार के सौ करोड़ बजट के अलावा हर राज्य अपने कैंपा मद से भी इस अभियान के लिए धन देगा।
ग्रेट इंडियन बस्टर्ड के अंडे वास स्थलों से लाकर संस्थान उनसे चूजे निकालकर पालेगा, इसके बाद फिर उन्हें वास स्थल पर पहुंचा दिया जाएगा। इसी तरह तीन चार साल में प्रसव करने वाली डॉल्फिन के बच्चे की परवरिश में संस्थान मदद करेगा। साथ ही वन्य जीवों के वास स्थलों को सुरक्षित किया जाएगा।
पहली बार वन्य जीव संस्थान को मिली ये जिम्मेदारी
भारतीय वन्य जीव संस्थान
- फोटो : फाइल फोटो
पहली बार केंद्र ने वन्य जीव संस्थान को शोध, प्रशिक्षण, शिक्षा के अलावा प्रजातियों के संरक्षण और संवर्धन की जिम्मेदारी दी है। संस्थान के निदेशक डॉ. वीबी माथुर ने बताया कि इस अभियान में जनता की सहभागिता सुनिश्चित की जाएगी और उन्हें जागरूक किया जाएगा।
इसके लिए उन्हें प्रोत्साहन राशि भी दी जाएगी। वन्य जीवों के संरक्षण के लिए नई सोच के साथ काम करना पड़ेगा। अभियान में वन्य जीवों के क्षेत्र में काम कर रही स्वयंसेवी संस्थाओं को भी जोड़ा जाएगा।
डीजी ने लॉंच किया मिशन
ग्रेट इंडियन बस्टर्ड, डॉल्फिन, समुद्री गाय और मणिपुरी हिरन की विलुप्तप्राय प्रजातियों को बचाने का अभियान महानिदेशक वन एवं पर्यावरण डॉ. एसएस नेगी ने सोमवार को भारतीय वन्य जीव संस्थान में लॉंच किया। उन्होंने कहा कि विलुप्त प्राय प्रजातियों को बचाने के लिए अब सोच में बदलाव की जरूरत है।
इन प्रजातियों को बचाने पर रहेगा खास फोकस
डॉल्फिन
- फोटो : wikipedia
ग्रेट इंडियन बस्टर्ड
इस प्रजाति के विश्व भर में सिर्फ 200 पक्षी बचे हैं। घास के मैदानों की यह प्रमुख प्रजाति है। शिकार और प्राकृतिक वास नष्ट होने से यह प्रजाति संकट में है।
डॉल्फिन
यह देश का राष्ट्रीय जलीय पशु है। इसकी संख्या में 50 फीसदी से अधिक गिरावट आई है। यह गंगा, ब्रह्मपुत्र आदि नदियों में पाया जाता है। जलीय इको सिस्टम की यह प्रमुख प्रजाति है। शिकार, प्रदूषण, वास स्थलों के नष्ट होने से खतरा है।
समुद्री गाय (डुगांग)
भारत के समुद्रीय तटों पर पाई जाने वाली डुगांग की इस समय 250 से भी कम संख्या है। मछुआरों के जालों में उलझने, प्रदूषण और वास स्थलों के नष्ट होने से इसके जीवन पर खतरा है। तट पर नजर नहीं आतीं।
मणिपुरी हिरण
मणिपुरी हिरण (संगाई) संकटग्रस्त प्रजातियों में से एक है। विश्व भर में इनकी संख्या 100 से 150 के बीच है। इस वक्त यह सिर्फ केइबुल लामजाओ राष्ट्रीय उद्यान मणिपुर में पाया जाता है।