हालांकि, भारतीय वन सर्वेक्षण के वैज्ञानिक सेटेलाइट के जरिए 24 घंटे जंगलों की निगरानी करते हैं और जहां पर भी आग लगने की घटना होती है, संबंधित राज्यों के आला अधिकारियों को तत्काल इसकी जानकारी दी जाती है।
लेकिन इतना सब कुछ होने के बावजूद जंगलों में आग लगने की घटनाएं साल दर साल बढ़ती जा रही हैं।
ऐसे में अब डीआरडीओ के वैज्ञानिकों ने वनाग्नि पर प्रभावी अंकुश के लिए विशेष प्रकार का फायर जैल तैयार किया है। डीआरडीओ वैज्ञानिक केसी वाधवा की अगुवाई में देहरादून से सटे थानों क्षेत्र के जंगलों में विशेष फायर जैल का ट्रायल किया गया। वन विभाग के एसडीओ बीबी मर्तोलिया के मुताबिक फिलहाल ट्रायल काफी हद तक सफल रहा है।
वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि डीआरडीओ वैज्ञानिकों ने जैल को पानी में मिलाकर फायर लाइन बनाई। परिणामस्वरूप आग आगे नहीं फैल पाई और प्रयोग बेहद सफल रहा। एसडीओ ने बताया कि एक बार स्प्रे करने पर जैल का प्रभाव चार-पांच दिनों तक रहता है और आग आगे नहीं बढ़ पाती।
यह प्रयोग मैदानी क्षेत्रों के जंगलों में लगने वाली आग के लिए काफी कारगर है। पर्वतीय क्षेत्रों के जंगलों में आग लगने पर फायर जैल का कोई खास उपयोग नहीं होगा। इसके लिए डीआरडीओ वैज्ञानिकों को कोई और तकनीक विकसित करनी होगी।