प्राथमिक लक्षणों के आधार पर आवश्यक दवाएं अस्पताल की ओर से दी जा रही हैं, लेकिन होम आइसोलेशन में जाने के बाद मरीजों की परेशानी बढ़ रही है।
उन्हें न तो समय पर काउंसिलिंग के लिए फोन किया जा रहा है और न ही कोरोना दवा की किट समय पर दी जा रही है। इस संबंध में प्रदेश के सचिव स्वास्थ्य अमित नेगी ने बताया कि होम आइसोलेशन में जाने वाले मरीजों की संख्या एकाएक तेजी से बढ़ी है।
इससे किट तैयार करने में कुछ समय लग रहा होगा। उन्होंने कहा कि कोरोना दवा किट की विभाग के पास कोई कमी नहीं है। अगर इसे लेकर कोई दिक्कत आ रही है तो वह मातहत अधिकारियों से बात कर समस्या का समाधान करने के दिशा-निर्देश देंगे।
बाजार में रेमडिसिविर इंजेक्शन गायब हो गया है। डॉक्टर तीमारदारों को जरूरत के हिसाब से मरीजों के लिए इस इंजेक्शन की व्यवस्था करने के लिए कह रहे हैं। इसके लिए तीमारदार एक केमिस्ट से लेकर दूसरे केमिस्ट के पास भटक रहे हैं, लेकिन उन्हें इंजेक्शन नहीं मिल पा रहा है। इसे देखते हुए तीमारदार मरीजों को राजकीय दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल रेफर करवा रहे हैं।
दरअसल, राजकीय दून मेडिकल अस्पताल में भर्ती मरीजों को यह इंजेक्शन लगाया जा रहा है, जो कि टेंडर के तहत पहले ही सरकारी कॉलेज अस्पताल प्रशासन द्वारा मंगाया चुका था। इससे दून अस्पताल पर मरीजों का दबाव बढ़ गया है। इससे अस्पताल की व्यवस्थाओं पर भी प्रभाव पड़ रहा है।