उत्तराखंड के ऊर्जा निगम में घोटालों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। प्रदेश में अधिकारियों को ब्लैक लिस्टेड कंपनियों को काम देने की इतनी जल्दी पड़ी हुई है कि इसके लिए जांच करने तक की जहमत नहीं उठाई जा रही है।
उत्तर प्रदेश ने जुलाई में जिस कंपनी को ब्लैक लिस्टेड (काली सूची) कर दिया, उसी कंपनी से ऊर्जा निगम प्रबंधन ने 25 केवीए के 350 ट्रांसफार्मर खरीदने का ठेका फाइनल कर दिया। अगले सप्ताह इसका निगम के साथ कंपनी का एग्रीमेंट भी हो जाएगा।
1500 नए ट्रांसफार्मर की जरूरत
उत्तराखंड में 25 केवीए के 1500 नए ट्रांसफार्मर की जरूरत थी। इसके लिए ऊर्जा निगम ने टेंडर किया था। तमाम औपचारिकताएं पूरी होने के बाद चार कंपनियों को उक्त ट्रांसफार्मर खरीदने का टेंडर पिछले सप्ताह ही फाइनल किया गया।
ब्लैक लिस्टेड है कंपनी
इसमें एक ऐसी कंपनी को 350 ट्रांसफार्मर खरीदने का टेंडर फाइनल किया गया है, जिसे दो जुलाई को ही उत्तर प्रदेश ने काली सूची में डाला था। ऊर्जा निगम के अधिकारियों को पहले भी इसकी शिकायत की गई थी, लेकिन नियमों को ताक पर रखकर सब खेल किया गया।
सूत्रों का कहना है कि उत्तर प्रदेश ने गुणवत्ता कम होने के मामले में ही उक्त कंपनी को काली सूची में डाला था। जबकि, उत्तराखंड ऊर्जा निगम ने उससे ही 350 ट्रांसफार्मर खरीदने का फैसला किया है।
ब्लैक लिस्टेड कंपनी के लिए इंतजार
बिजली के खंभों पर लगने वाले कंडक्टर लगभग खत्म हो चुके हैं, लेकिन इसके लिए टेंडर फाइनल नहीं किया जा रहा है। सूत्रों का कहना है कि एक कंपनी को पूर्व में उत्तराखंड और पंजाब ने ब्लैक लिस्टेड किया था।
कंपनी ने काली सूची से बाहर आने के लिए सिफारिश लगा रखी है। संभव है कि अगले एक माह के भीतर इसे काली सूची से बाहर भी कर दिया जाएगा, जिसके बाद कंडक्टर खरीद के लिए टेंडर किया जाए।
इनकी भी सुनिए
मेरे संज्ञान में नहीं है कि ब्लैक लिस्टेड कंपनी को 350 ट्रांसफार्मर खरीदने के लिए ठेका दिया गया है। अगर ऐसा है तो इसे चेक कराकर संबंधित कंपनी का टेंडर निरस्त कर दिया जाएगा। साथ ही गलत शपथ पत्र देने के लिए उस पर जुर्माना भी किया जाएगा।
- चैत राम गोस्वामी, महाप्रबंधक कारपोरेट एंड परचेज ऊर्जा निगम उत्तराखंड