वरिष्ठ कांग्रेसी नेता और पूर्व मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी का विवादों से पुराना नाता है। भले ही कई आरोप उन पर लगे हों, लेकिन भ्रष्ट राजनीति से वह हमेशा दूर रहे।
मामूली आरोप कहें या चुगली पर उनके ही पिता पूर्णानंद तिवारी ने एनडी तिवारी को संपत्ति से बेदखल कर दिया था। हालांकि, इसमें एनडी तिवारी की भी सहमति थी। इसके बाद पुरखों की जो बची हुई जमीन थी वह तिवारी जी के सिद्धांतों की भेंट चढ़ गई।
एनडी के चचेरे भाई दुर्गादत्त तिवारी कहते हैं कि यही वजह है कि पूर्व मुख्यमंत्री एनडी तिवारी के मूल गांव अक्सोड़ा में आज उनके नाम कोई संपत्ति नहीं है।
एनडी को कभी नहीं रही संपत्ति की चाह
एनडी तिवारी के रोहित शेखर को पुत्र स्वीकारने के बाद उनकी संपत्ति को लेकर भी चर्चाएं आम हैं, लेकिन उनके चचेरे भाई दुर्गादत्त कहते हैं कि एनडी तिवारी में कभी संपत्ति की चाह नहीं रही।
1951-52 में ही श्री तिवारी के पिता और स्वतंत्रता संग्राम सेनानी पूर्णानंद तिवारी ने एनडी को संपत्ति से बेदखल कर दिया था। दुर्गादत्त ने बताया कि बतौर विधायक एनडी तिवारी ने विनायक से पदमपुरी तक सड़क स्वीकृत कराई।
सड़क चट्टानों को काटकर बननी थी इस वजह से कोई ठेकेदार आगे नहीं आया तो बाबूजी (पूर्णानंद तिवारी) ने ठेका ले लिया।
बयानबाजी के चलते छोड़ दी पैतृक संपत्ति
दुर्गादत्त कहते हैं कि बाबूजी के ठेका लेने के बाद कुछ अधिकारियों ने यह कहना शुरू कर दिया कि बेटा विधायक और पिता ठेकेदार। इस बयानबाजी के खिलाफ ही एनडी को सहमति से अक्सोड़ा की संपत्ति से बेदखल किया गया।
इसके अलावा बाबूजी की कुछ जमीन तिवारी जी के दिए उस नारे के बाद जाती रही, जिसमें उन्होंने कहा था कि जमीन जो जोतेगा, जो रोपेगा उसी की होगी।
तब एनडी तिवारी की जमीन के अधिकांश हिस्सों पर बटाईदार काम करते थे और उन्होंने जमीन अपने नाम करा ली। इस वजह से भी एनडी तिवारी के पास मूल गांव में कोई संपत्ति नहीं बची।
रोहित से मतलब नहीं : दुर्गादत्त
दुर्गादत्त कहते हैं कि एनडी तिवारी हमेशा उनके आदर्श रहेंगे। उनके स्वागत के लिए वह हमेशा तैयार रहेंगे, लेकिन रोहित शेखर से उनका कोई मतलब नहीं और न संबंध है।