नितिन ने उसकी मजबूरी का फायदा उठाया और थाईलैंड के पास ही केके पार्क में नौकरी लगवाने का झांसा दिया। फिर नितिन ने गुलाम नाम के एजेंट से संपर्क करवाया। गुलाम ने ऑनलाइन इंटरव्यू करवाया और अगले ही दिन एक गाड़ी से बॉर्डर ले गया। उस गाड़ी के ड्राइवर ने सत्यापन के बहाने रास्ते में सौरव और उसके दोस्त के पासपोर्ट लेलिए। उन्होंने टेक सिटी में एक होटल में रुकवाया। उस होटल से रात तीन बजे फिर से उन्हें बैठा लिया। अगले सफर में पांच-छह गाड़ियां बदलकर जंगलों के रास्ते ले जाया गया।
थाईलैंड और म्यांमार की सीमा पर स्थित नदी को नाव से पार करवाकर अवैध तरीके से म्यांमार में प्रवेश कराया गया। म्यांमार सीमा में दाखिल होते ही उन्हें कथित तौर पर एक आर्मी वाहन में भरकर केके पार्क पहुंचा दिया गया। सौरव ने बताया कि वहां उनसे 18 घंटे लगातार काम लिया जाता। सिर्फ चार घंटे सोने देते थे। सैलरी भी बस गुजारा करने लायक मिलती थी।
केके पार्क के जाल में उत्तराखंड के युवा फंसे हैं, जिनके सामने आने पर पुलिस जांच कर रही है। यदि किसी मामले में रिक्रूट्स की भूमिका में स्थानीय एजेंट शामिल हैं तो उनके खिलाफ होगी। शिकायत की जांच करवाई जाएगी।
- डॉ. नीलेश आनंद भरणे, आईजी, एसटीएफ