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Cyber crime: म्यांमार केके पार्क में साइबर गुलामी का जाल, उत्तराखंड के कई युवा हुए शिकार, युवक ने सुनाई आपबीती

Sun, 11 Jan 2026 02:22 PM IST
अलका त्यागी अवनीश चौधरी, माई सिटी रिपोर्टर, देहरादून

सार

साइबर क्राइम को लेकर म्यांमार स्थित केके पार्क साइबर गुलामी का अड्डा बन गया है। उत्तराखंड के कई युवा अब इसके शिकार हो रहे हैं। 
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साइबर ठगी का अंतरराष्ट्रीय अड्डा केके पार्क - फोटो : माई सिटी रिपोर्टर
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विस्तार
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म्यांमार स्थित केके पार्क में साइबर गुलामी से छूटा एक और पीड़ित सामने आया है, जिसे देहरादून से थाइलैंड पहुंचाने के बाद जंगल-नदी के रास्ते अवैध रूप से केके पार्क ले जाया गया। वहां बंधक रखकर 18-18 घंटे साइबर ठगी करवाई गई। उसे फंसाने में देहरादून के स्थानीय एजेंट्स से लेकर दिल्ली और थाईलैंड तक एजेंट्स शामिल रहे। उसकी आपबीती से साफ होता है कि किस तरह केके पार्क साइबर ठगी का अंतरराष्ट्रीय अड्डा बन चुका है।

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इस संबंध में अमर उजाला से एक पीड़ित युवक ने आपबीती साझा की है। उसने देहरादून एसटीएफ को भी शिकायत दी है, लेकिन उस पर अभी तक कोई कार्यवाही नहीं की गई है। पीड़ित सौरव परिहार चमोली का रहने वाला है।

जॉब के सिलसिले में वह देहरादून आया था। यहां एक एजेंट ने उसे देहरादून से दिल्ली और फिर होटल जॉब के लिए थाईलैंड भेजा था, लेकिन वहां कोई नौकरी नहीं मिली। परेशानी की हालत में 26 सितंबर 2025 को अपने जानने वाले नितिन रमोला को फोन किया कि उन्हें थाईलैंड में कोई जॉब नहीं मिली है।
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नितिन ने उसकी मजबूरी का फायदा उठाया और थाईलैंड के पास ही केके पार्क में नौकरी लगवाने का झांसा दिया। फिर नितिन ने गुलाम नाम के एजेंट से संपर्क करवाया। गुलाम ने ऑनलाइन इंटरव्यू करवाया और अगले ही दिन एक गाड़ी से बॉर्डर ले गया। उस गाड़ी के ड्राइवर ने सत्यापन के बहाने रास्ते में सौरव और उसके दोस्त के पासपोर्ट लेलिए। उन्होंने टेक सिटी में एक होटल में रुकवाया। उस होटल से रात तीन बजे फिर से उन्हें बैठा लिया। अगले सफर में पांच-छह गाड़ियां बदलकर जंगलों के रास्ते ले जाया गया।

थाईलैंड और म्यांमार की सीमा पर स्थित नदी को नाव से पार करवाकर अवैध तरीके से म्यांमार में प्रवेश कराया गया। म्यांमार सीमा में दाखिल होते ही उन्हें कथित तौर पर एक आर्मी वाहन में भरकर केके पार्क पहुंचा दिया गया। सौरव ने बताया कि वहां उनसे 18 घंटे लगातार काम लिया जाता। सिर्फ चार घंटे सोने देते थे। सैलरी भी बस गुजारा करने लायक मिलती थी।

केके पार्क के जाल में उत्तराखंड के युवा फंसे हैं, जिनके सामने आने पर पुलिस जांच कर रही है। यदि किसी मामले में रिक्रूट्स की भूमिका में स्थानीय एजेंट शामिल हैं तो उनके खिलाफ होगी। शिकायत की जांच करवाई जाएगी।
- डॉ. नीलेश आनंद भरणे, आईजी, एसटीएफ
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