पहाड़ों पर हो रही बारिश और चमोली समेत दो जिलों में बादल फटने की घटना से कारोबार पर भी असर पड़ा है।
मसूरी में जहां 25 फीसदी होटलों की एडवांस बुकिंग कैंसिल हो गई है। वहीं तीर्थनगरी ऋषिकेश में श्रद्धालुओं की आमद 15 फीसदी तक गिर गई है। यही हाल दून का भी है।
होटल व्यवसायी इसके पीछे बड़ी वजह इलेक्टॉनिक और सोशल मीडिया पर उत्तराखंड की बारिश को काफी बढ़ा-चढ़ाकर दिखाना मान रहे हैं। उधर जीएमवीएन के अधिकारियों का कहना है कि पर्यटकों की आमद कम होने की वजह स्कूलों की छुट्टियां खत्म होना है।
उत्तराखंड होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष संदीप साहनी ने दावा किया कि भारी बारिश की चेतावनी के चलते मसूरी-नैनीताल और अन्य स्थानों की ऑन लाइन बुकिंग कैंसिल हो गई। इससे होटल व्यवसाय पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। बीते दिन नगर से करीब तीन से चार हजार पर्यटक वाहनों की वापसी हुई है।
हालांकि इनमें से कई स्कूली छुट्टी खत्म होने की वजह से वापस हुए हैं। रविवार को मौसम खुशनुमा होने पर काफी संख्या में पर्यटक दिल्ली, चंडीगढ़ और पंजाब के शहरों से आए हुए हैं। उधर तीर्थनगरी में पंजाब एंड सिंध क्षेत्र धर्मशाला में 30 जून से पहले रोजाना 250 से 300 यात्री पहुंच रहे थे।
अब यह संख्या घटकर 50 से 75 के बीच रोजाना रह गई है। होटल व्यवसायी संदीप गुप्ता का कहना है कि 2013 में आई आपदा के बाद इस साल यात्रा अच्छी चल रही थी। पर यहां की खबरों को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाने से यात्रियों की संख्या में काफी कमी आई है। ऑन लाइन एंडवास बुकिंग वाले यात्री अपनी बुकिंग रद्द करा रहे हैं।
गढ़वाल मंडल विकास निगम के प्रबंधक आरएस नौटियाल का भी कहना है कि आपदा से चार धाम यात्रा ज्यादा प्रभावित नहीं हुई है। स्कूल, कॉलेज खुलने से पर्यटकों का यहां आना कम हुआ है। यही वजह है कि 15 प्रतिशत पर्यटकों का आवास गृह में आना कम हुआ है।