हजारों साल तक सूखे से तपाने के बाद प्रकृति ने हिमालयी क्षेत्र में एक नई दुनिया बस दी है।
इस इलाके को पहले दो हजार साल तक बूंद-बूंद पानी के लिए तरसाया, फिर चार हजार साल तक लगातार बारिश हुई। यूं कहें कि मानसून टूट कर बरसा। इस बारिश ने हिमालय क्षेत्र को हराभरा कर दिया और एक नई दुनिया ने जन्म लिया। नदियां पैदा हुईं और इनके किनारे सभ्यता का विकास शुरू हो गया।
हिमालय क्षेत्र में मानसून की मेहरबानी से लगातार चार हजार साल तक बारिश का रिकार्ड वाडिया हिमालय भू-विज्ञान संस्थान और ब्राउन यूनिवर्सिटी अमेरिकी की संयुक्त टीम को गुफाओं के लाइम स्टोन की परतों में दबा मिला है। हर परत के अध्ययन के साथ बारिश की स्थिति और इसके समय का आंकड़ा उजागर होता चला गया।
वाडिया हिमालय भू-विज्ञान संस्थान के निदेशक डॉ. एके गुप्ता के साथ स्टीवन सी. क्लीमेंस, आर. लॉरेंस एडवर्ड, हाए चेंग आदि विज्ञानियों ने उत्तराखंड और मेघालय की गुफाओं के लाइम स्टोन के अध्ययन से हिमालयी क्षेत्र में प्रत्येक सहस्त्र वर्ष के मानसूनी आंकड़े निकाले हैं।
लाइम स्टोन की परतों के अध्ययन के मुताबिक हिमालयी क्षेत्र में बारिश का यह सिलसिला 10 हजार साल पहले शुरू हुआ था, जो चार हजार साल तक चलता रहा। इससे वातावरण को पर्याप्त नमी मिली। अध्ययन रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि इस बारिश के बाद कृषि, पशुपालन और सभ्यता का दौर शुरू हुआ था।
फल-सब्जियों की पैदावार शुरू हो गई। भूगर्भ जल का स्ट्रेटा कायदे से रिचार्ज हुआ जो आज तक चल रहा है। इसके साथ ही हिमालयी क्षेत्र में मानसून की स्थिति को स्थिरता मिल गई।
लाइम स्टोन स्टडी में पाया गया कि चार हजार साल की बारिश के बाद ही कृषि, सभ्यता का विकास शुरू हुआ। लोगों ने जानवर पालने शुरू किए। इस सभ्यता के विभिन्न चरणों के विकास के बाद सिंधु घाटी की सभ्यता वगैरह अस्तित्व में आईं। इस बारिश ने हिमालयी क्षेत्र की तस्वीर बदल दी।
- डॉ. एके गुप्ता, टीम लीडर शोध टीम, निदेशक वाडिया हिमालय भू-विज्ञान संस्थान