मानसून आने वाला है। कुछ दिनों बाद झमाझम बारिश शुरू हो जाएगी। आईएसबीटी क्षेत्र के बाशिंदों को अभी से जलभराव का डर सताने लगा है। अभी सरकारी तंत्र कोई सुध नहीं ले रहा है। नालों से लेकर सीवर लाइन के मेन होल की सफाई को लेकर कोई पहल नहीं की गई है। आईएसबीटी क्षेत्र में 13 साल पूर्व नाला बना था। संकरा होने के कारण बरसाती पानी इस नाले में जाकर ओवरफ्लो हो जाता है। नतीजा जलभराव के रूप में सामने आता है। आईएसबीटी में जलभराव की एक नहीं कई वजहें हैं। सब कुछ जानकर भी सरकारी विभाग आंख मूंदे हैं। पिछली बरसात को पूरा एक साल गुजर गया, समस्या के निस्तारण को कोई कदम नहीं उठाया गया। अब बरसात आने वाली है तो सरकारी विभाग फिर फाइलों को एक दूसरे के पाले में डालने लगे हैं।
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पहली वजह-
पंप लगाकर पानी छोड़ते है पिटकुल-यूपीसीएल, होता जलभराव
पिटकुल व यूपीसीएल कैंपस के अंदर बरसात के दिनों में भारी जलभराव हो जाता है। इनके पास अपने परिसर की जल निकासी की कोई व्यवस्था नहीं है। यह दोनों संस्थाएं पंप लगाकर अंदर का पानी बाहर सड़क पर छोड़ देते हैं। आईएसबीटी के पास पहले ही जल निकासी की समस्या है। आसपास का पानी ही ठीक से नहीं निकल पाता। इस पर पिटकुल व यूपीसीएल के अंदर का पानी बाहर आकर समस्या को बढ़ा देता है। लोनिवि का कहना है कि इन दोनों संस्थाओं को अपने पानी की निकासी का इंतजाम करना चाहिए। सड़क पर पानी छाेड़ने से समस्या होना स्वाभाविक है।
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दूसरी वजह-
पीछे चौड़ा, आगे संकरा होने से उफनता है नाला
कमला पैलेस से होकर निकला नाला भरपूर चौड़ाई के साथ आता है, लेकिन पिटकुल के सामने आने पर यह संकरा हो जाता है। पीछे चौड़ा व आगे संकरा होने के कारण फ्लो में आ रहा पानी पिटकुल के पास नाले से बाहर निकलकर सड़क पर आ जाता है। नाले की चौड़ाई बढ़ाने की राह में कई रोड़े हैं। यूपीसीएल की लाइन के अलावा जल संस्थान की पेयजल लाइन व इलेक्टि्रक पोल भी बाधा बने हुए हैं। इस कारण नाला चौड़ा नहीं हो पा रहा। आगे राजा राम मोहन राय अकेडमी के पास जाकर नाला फिर चौड़ा हो जाता है। अगर पिटकुल से ट्रांसपोर्ट नगर तक नाला चौड़ा हो जाए तो काफी राहत मिल जाएगी।
तीसरी वजह
सीवरलाइन पर बढ़ता लोड तो भर जाता ओवरब्रिज के नीचे पानी
पिटकुल के सामने से ही सीवरलाइन भी गुजरती है। बरसात में जलभराव होने पर सीवरलाइन भी चोक हो जाती है। खासकर आईएसबीटी ओवरब्रिज के नीचे बना मेल होल में कुछ तकनीकी समस्या होने के कारण यह पानी भरने पर चोक हो जाता है। दरअसल शिमला बाईपास की ओर से आने वाली सीवरलाइन का पानी आईएसबीटी के पास आकर एकत्र हो जाता है। इस कारण समस्या होती है। जल संस्थान अब सीवर लाइन को बाईपास कर सीधे हरिद्वार रोड पर निकालने की तैयारी कर रहा है, यह मानना है कि सीवरलाइन ओवरब्रिज के नीचे से न ही गुजरेगी, न ही वहां पर जलभराव होगा। इसके लिए जल संस्थान ने एस्टीमेट तैयार किया है।
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बसों का संचालन भी होता है प्रभावित
पिछले साल बरसात में शहर के कई हिस्सा में जलभराव होने से आमजन को भारी परेशानी उठानी पड़ी थी। आईएसबीटी ग्राउंड में जलभराव होने से बसों का संचालन भी प्रभावित रहा। ट्रांसपोर्टनगर, मोहेब्बेवाला, आशारोड़ी आदि क्षेत्रों में लोगों के घरों में बरसात का पानी घुसने से लोगों को क्षति उठानी पड़ी। अब बरसात का सीजन आने से फिर जलभराव को लेकर लोगों की चिंता बढ़ने लगी है।
एक साल पहले जो हालात थे, आज भी वैसे ही हैं। बरसात के पानी का निकास नालों में पूरी तरह से नहीं हो पाता। पानी ओवरफ्लो होने लगता है। इससे पानी घरों में घुस जाता है।
-रामकुमार, ट्रांसपोर्ट नगर
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जल निकास के लिए नालों का आकार पर्याप्त नही है। कई बार जनप्रतिनिधियों से भी मामले में शिकायत की जा चुकी है। लेकिन, आश्वासन के सिवाय अब तक कुछ नहीं हुआ। कॉलोनियों के पानी को देखते हुए नाले का आकार बड़ा होना चाहिए।
-गिरवर साहू, ट्रांसपोर्ट नगर
पिछले साल दुकान में पानी भरने से सभी सामान बरबाद हो गया था। अधिकारियों ने निरीक्षण कर समस्या का समाधान करने का आश्वासन दिया गया। लेकिन, आज तक कुछ नहीं हुआ। कॉलोनियों से आने वाला पानी ओवरफ्लो होकर उल्टा मकानों में ही भरने लगता है।
- विकास सिंह, आशारोड़ी
कॉलोनियों और आबादी का विस्तार हो गया है। लेकिन, नालों की चौड़ाई और डिजाइन पुराने समय की है। इनकी सफाई भी नहीं होती। बरसात के दिनों में जलभराव होने लगता है। पार्षद और निगम अधिकारियों को कई बार मामले से अवगत कराया। लेकिन,कोई सुनने को तैयार रही।
-दुष्यंत, ट्रांसपोर्ट नगर
बयान
पिटकुल के सामने नाले की चाैड़ाई पहले ही कम है, इस पर बरसात में पिटकुल और यूपीसीएल पंप लगाकर अपने परिसर का पानी बाहर सड़क पर छोड़ देते हैं, इससे जलभराव की स्थिति आ जाती है। नालों व सीवर लाइन की सफाई भी ठीक तरह से नहीं होने के कारण जलभराव हो जाता है।
-दीपक गुप्ता, अधिशासी अभियंता, दून एनएच डिवीजन
सीवर लाइन को आईएसबीटी ओवरब्रिज के नीचे से गुजारने के बजाय बाईपास कर हरिद्वार रोड पर निकालने की तैयारी है, इसके लिए बजट का प्रावधान किया गया है, जल्द सीवर लाइन सीधे हरिद्वार रोड पर निकाली जाएगी, इससे काफी राहत मिलेगी।
राजीव सैनी, अधीक्षण अभियंता, जल संस्थान
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बाहर पानी निकालना पिटकुल की मजबूरी है, अंदर बिजली का पूरा काम होता है, अगर पानी नहीं निकाला जाएगा तो समस्या आ जाएगी। सड़क पर पानी निकालना भी ठीक नहीं है, इसके लिए नगर निगम से मिलकर कोई योजना बनाई जाएगी, ताकि पानी को सीधे सीवरलाइन या नाले में गिराया जा सके।
- अशोक जुयाल, जीएम, पिटकुल