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उत्तराखंड: जल स्रोतों ने कराया जड़ों से जुड़ाव

Wed, 03 Feb 2016 04:26 PM IST
मनीष चंद्र भट्ट/ अमर उजाला, देहरादून
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उत्तराखंड में त्यूणी के अटाल और सैंज गांव में स्रोतों के पानी ने ग्रामीणों की तकदीर बदल दी।
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पहाड़ में बसे इन गांवों में पानी पहुंचा तो किसानों के खेत लहलहा गए। पलायन कर गए लोग गांव लौटे और अब खेती कर खुशहाल हैं। गांव के किसान राजेंद्र राणा को कम जमीन में अधिक सब्जी उगाने पर वाराणसी में जनवरी में संपन्न राष्ट्रीय किसान मेले में कांस्य पदक मिला है।

गांव में जल स्रोतों के पानी को खेतों तक पहुंचाने में भारतीय मृदा एवं जल संरक्षण संस्थान के वैज्ञानिकों ने भी मदद की।
सोमवार को कौलागढ़ स्थित संस्थान में पहुंचे ग्रामीणों के समूह ने इस मुहिम को और आगे बढ़ाने की बात कही। संस्थान के वैज्ञानिकों ने बताया कि अटाल और सैंज गांव में 325 से अधिक परिवार रहते हैं।
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इनमें से आधे से अधिक खेती से गुजर बसर करते हैं। बताया गया कि पहले सिंचाई की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने से उपलब्ध जमीन की तुलना में फल, सब्जी और अनाज बहुत कम होता था। इस वजह से बीते सालों में सैंज गांव के 80 में 30 परिवार रोजी-रोटी की तलाश में पलायन कर गए। अटाल गांव से भी लोग मैदानी क्षेत्रों की तरफ निकलते गए।

इसी बीच अटाल गांव के किसान जगदीश शर्मा वर्ष 2013 में भारतीय मृदा एवं जल संरक्षण संस्थान के वैज्ञानिकों से मिले। वैज्ञानिकों ने गांव का दौरा किया तो पाया कि जल स्रोतों के पानी को एकत्र कर खेतों तक पहुंचाया जा सकता है। वर्ष 2013 में ही किसानों ने अटाल सैंज फल और सब्जी उत्पादक संगठन गठित किया।

संस्थान के निदेशक डॉ. पीके मिश्रा, वैज्ञानिक डॉ. एनके शर्मा, डॉ. लखन सिंह, डॉ. डीवी सिंह, डॉ. एसी राठौर, तकनीकी अधिकारी केआर जोशी आदि की टीम ने जनजाति उपयोजना के तहत किसानों को जनसहभागिता के लिए प्रेरित किया। जल स्रोतों से दोनों गांवों के खेतों तक छह-छह किलोमीटर पाइप डालकर निष्क्रिय पड़े टैंक तक पानी पहुंचाया।

इसमें संस्थान के 16.30 लाख और किसानों की जमा राशि 3.67 लाख रुपये लगे। ग्रामीणों ने श्रमदान भी किया। आज खेतों तक पानी पहुंचने पर किसान सेब, गोभी, मटर, अनार आदि उगाकर खुशहाल हैं। खेत उपजाऊ हुए तो सैंज के 12 परिवार पिछले एक साल में गांव लौट चुके हैं।

केस वन:  सैंज गांव के किसान भागमल शर्मा खेतीबाड़ी न होने पर परिवार समेत करीब सात साल पहले पलायन कर गए थे। लगभग दो साल पहले लौटे। पांच बीघा जमीन पर टमाटर, गोभी, मटर उगाकर सालाना दो लाख रुपये तक कमा दे रहे हैं। उनके बच्चे देहरादून में रहते हैं। सेब के पौधे भी उगाए हैं, लेकिन अभी सेब के फल लगने में कुछ वक्त लगेगा। ऐसे में कमाई भी बढ़ जाएगी।

केस टू: इसी गांव के दिनेश शर्मा भी गांव वापस गए हैं। करीब पांच बीघा अपनी और कुछ जमीन लीज पर लेकर भी खेती कर रहे हैं। दिनेश भी साल भर में ढाई लाख रुपये तक कमा रहे हैं। दिनेश के तीन बाकी भाई भी खेतीबाड़ी कर रहे हैं।

1780 बस्तियों में नहीं आता पानी
गढ़वाल मंडल की 1780 बस्तियां आज भी पानी से महरूम है। इन बस्तियों में रहने वालेे हजारों परिवारों को प्यास बुझाने के लिए जल स्रोतों पर निर्भर रहना पड़ रहा है।

उल्लेखनीय है कि उत्तराखंड बनने की शुरुआत से ही हर गांव एवं बस्ती को पेयजल सुविधा से जोड़ने पर काफी जोर दिया जा रहा है। जिला, राज्य समेत सभी योजनाओं में पेयजल योजनाओं के निर्माण को काफी प्राथमिकता दी जा रही है। इसके बावजूद भी पौड़ी जनपद के खातस्यूं पट्टी में पड़ने वाले भैस्वाड़ा समेत कई गांवों में पानी की समस्या अपनी जगह बरकरार बनी है। इन गांवों तक पानी पहुंचाने के लिए पेयजल योजनाओं का निर्माण नहीं हो पाया है।

भैस्वाड़ा गांव में रह रहे लोग अभी भी गांव से एक किलोमीटर दूर हैंडपंप से पानी लाकर प्यास बुझा रहे हैं। जल महकमे के अनुसार, गढ़वाल मंडल में 20462 बस्तियों में से मात्र 6745 बस्तियां ही पूर्ण रूप से पेयजल सुविधा से आच्छादित हैं। 11701 बस्तियां पानी की सुविधा से आंशिक रुप से आच्छादित हैं। इनमें बस्तियों में  अभी कई घरों तक पानी नहीं पहुंच पाया है। 1780 बस्तियां ऐसी है जिनमें पेयजल सुविधा नहीं है।

इन बस्तियों में रह रहे हजारों परिवार पानी के लिए पूरी तरह जल स्रोतों पर निर्भर हैं। इनमें रह रहे परिवारों को पेयजल सुविधा से जोड़ने के लिए कोई प्रयास नहीं हो पाए हैं। हालांकि शासन की ओर से इन्हें शून्य से पच्चीस फीसदी तक पेयजल सुविधा से आच्छादित बस्तियों की सूची में दिखाया गया है।

पौड़ी जनपद में है सबसे ज्यादा जल संकट
गढ़वाल मंडल में पौड़ी जिला सबसे ज्यादा जल संकट से जूझ रहा है। पौड़ी जिले में सर्वाधिक 840 बस्तियों पेयजल सुविधा से पूरी तरह वंचित है। इसके अलावा चमोली जनपद में 309, देहरादून में एक, हरिद्वार में चार, रुद्रप्रयाग में दो टिहरी में 597, उत्तरकाशी में 27 बस्तियों में पानी की सुविधा नहीं है। पेयजल सुविधा आंशिक रूप से जुड़ी बस्तियों में 2416 बस्तियां पौड़ी में, 1019 चमोली में, 1561 देहरादून में, 315 हरिद्वार में, 984 रुद्रप्रयाग में, 4231 टिहरी में, 1135 बस्तियां उत्तरकाशी में हैं।
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भारत सरकार की ओर से निर्धारित नए मानकों के अनुसार मंडल में जो बस्तियां पेयजल सुविधा वंचित हैं। उन्हें शून्य से पच्चीस प्रतिशत तक की पेयजल सुविधा से आच्छादित बस्तियों की श्रेणी में रखा गया है। पेयजल सुविधा से पूरी तरह व आंशिक रूप से वंचित बस्तियों तक पानी पहुंचाने के लिए कवायद हो रही है। इसके लिए हर साल निर्धारित लक्ष्य के अनुसार कार्य किया जा रहा है। इन बस्तियों की संख्या भी समय-समय पर बदल रही है।
- आरके जोशी मुख्य अभियंता जल निगम, गढ़वाल मंडल पौड़ी
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