नहर चौड़ीकरण के कारण हरिद्वार कनखल में गंगाजल की मात्रा घटते-घटते शून्य होने के करीब हैं। पहाड़ों में बर्फबारी के चलते गंगा में जल की मात्रा और घट गई है।
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इस संबंध में संतों ने एक बार फिर से उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग को चेतावनी दी है। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय प्रवक्ता बाबा दिगंबर ने बताया कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को कईं पत्र भेजे गए और कुछ संतों ने उनसे वार्ता भी की।
अनिश्चितकालीन आंदोलन छेड़ा जाएगा
बावजूद इसके कनखल में जल की मात्रा घटती जा रही है। आंदोलन से पूर्व संत समाज एक बार फिर से उतर प्रदेश सरकार को जल छोड़ने की चेतावनी दे रहा है।
यदि एक सप्ताह के भीतर पांच से छह फुट जल की व्यवस्था नहीं की गई तो अनिश्चितकालीन आंदोलन छेड़ दिया जाएगा।
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महानिर्वाणी अखाड़े के सचिव श्रीमहंत रविंद्र पुरी ने बताया कि कनखल के घाटों पर जल की मात्रा जिस प्रकार घटी है वह सोच का विषय है। अगले महीने कांवड़ यात्रा होने वाली है। उस समय प्रचुर मात्रा में यहां जल चाहिए।
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जल की मांग को लेकर कनखलवासी अब आंदोलन की तैयारियों में जुट गए हैं। उधर, अस्थि प्रवाह घाट पर कम जल होने से तीर्थ पुरोहित समाज भी खफा है।
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पंडित राजकुमार त्रिपाठी, प्रदीप लूतिया, जितेंद्र शास्त्री, मणिकांत अल्हड़, शशिकांत आदि ने उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग के अधिकारियों से पांचवीं बार भेंट की।
कनखल की उपेक्षा पर रोष जताते हुए चेतावनी दी गई कि सिंचाई विभाग लोगों के सब्र की परीक्षा न लें। गंगाजल को लेकर यहां के लोग किसी भी सीमा तक जाने को तैयार हैं।