नगर निगम सभागार में राज्य आंदोलन के प्रणेता स्व.रणजीत सिंह वर्मा को समर्पित कार्यक्रम में नुक्क?
जल संरक्षण की सीख देता नाटक पाणी की गांणी का सोमवार को टाउन हॉल में मंचन किया गया। गढ़वाली नाटककार गजेंद्र नौटियाल ने यह नाटक वर्ष 2000 में जल संरक्षण अभियान के लिए लिखा था। नाटक में जहां जल संरक्षण के पारंपरिक तरीकों को बताया गया है, वहीं वर्तमान में जल संरक्षण के लिए उठाए गए कदमों पर सवाल भी खड़े किए गए हैं।
नाटककार गजेंद्र नौटियाल ने बताया कि जल संरक्षण में पुरातन समय से हमारे लोग माहिर थे। वह अपने पारंपरिक तरीकों जिसमें चाल-खाल, जल कलश, धारा पुजाई, भगवान को जल चढ़ाना सहित कई ऐसे तरीके अपनाते थे, जो जल संरक्षण की दिशा में काफी मददगार साबित होते थे। नाटक में इन सभी तरीकों को जीवंत रूप में दिखाया गया है। वर्तमान में जल संरक्षण के लिए जो तरीके अपनाए जा रहे हैं, उन पर भी नाटक में फोकस किया गया है, साथ ही जल संरक्षण के लिए किए जा रहे तरीकों पर व्यंग के माध्यम से सवाल भी खड़े किए गए हैं। साथ ही पानी की लगातार हो रही कमी से उत्पन्न खतरों आदि के बारे में लोगों का जागरूक करने का प्रयास किया गया है।
हर प्रारूप के नाटक लिख चुके हैं गजेंद्र नौटियाल
गजेंद्र नौटियाल गढ़वाली भाषा के अकेले ऐसे नाटककार हैं, जिन्होंने नुक्कड़, मंचीय व कठपुतली नाटक के साथ ही रेडियो नाटक सभी नाट्य विद्या के हर प्रारूप में लिखे हैं। स्वयं के लिखे इन नाटकों का निर्देशन और अभिनय कर वह इनका प्रदर्शन डेढ़ हजार गांवों में कर चुके हैं। उन्होंने 1981-82 में मुंबई मिल मजदूरों की हड़ताल में इप्टा नाट्य संस्था से जुड़कर नुक्कड़ किए और मंचीय नाटक लिखे। इसके बाद 1995 में उत्तराखंड में एक गैर सरकारी संस्था के साथ जुड़कर कठपुतली नाटक और नुक्कड़ नाटक किए। 1996 से आकाशवाणी नजीबाबाद से जुड़कर उन्होंने आठ रेडियो नाटक लिखे।