देश में हर व्यक्ति हर रोज 0.5 किलो वेस्टेज करता है। अगर इससे निपट लिया जाए तो बड़ी मात्रा में ऊर्जा जेनरेट की जा सकती है। उत्तराखंड की बात करें तो यहां चार मेगावाट ऊर्जा ‘कूड़ा’ हो रही है। इसकी रिकवरी संभव है।
विभिन्न राज्यों के एनर्जी रिकवरी पोटेंशियल में यह विश्लेषण सामने आया है। यूपीईएस के प्रवक्ताओं कृष्ण कुमार पांडेय और खंजन अजय कल्याणी के ‘वेस्ट टू एनर्जी स्टेटस’ इन इंडिया विषय पर आधारित इस पेपर को रिन्यूएबल एंड सस्टेनेबल एनर्जी रिव्यू नाम के प्रतिष्ठित जर्नल ने भी प्रकाशित किया है।
इस पर भरोसा करें तो इसमें आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र के पश्चात रिकवरी पोटेंशियल में उत्तर प्रदेश का नाम आता है। यहां वेस्टेज से सबसे अधिक 154 मेगावाट ऊर्जा जेनरेट की जा सकती है।
डंपिंग भी परेशानी
कूड़े को डंप किया जाना भी परेशानी भरा है। काफी कूड़ा जमीन पर ही छूट जाता है। पेपर में बताया गया है कि यह कूड़ा ग्रीन हाउस गैसों के खतरे में इजाफा करता है। इसके अलावा कार्बन-डाई-आक्साइड आदि गैसों के लीकेज से स्वास्थ्य को खतरा तो बना ही है।
दूसरे दिन भी पढ़े गए पेपर
यूनिवर्सिटी आफ पेट्रोलियम एंड एनर्जी स्टडीज (यूपीईएस) के एसपीई स्टूडेंट चैप्टर की तरफ से शुरू हुए अंतर्राष्ट्रीय महोत्सव का शुक्रवार को दूसरा दिन था।
इस चार दिवसीय महोत्सव में तेल एवं गैस पर समेत वैकल्पिक ऊर्जा के क्षेत्र में हो रहे शोध एवं विकास कार्यों पर शोध पत्र प्रस्तुत किए गए। इसमें न केवल अपने देश बल्कि इंडोनेशिया, नाइजीरिया, कजाकिस्तान, सऊदी अरब, इजिप्ट के विश्वविद्यालयों के छात्र भी शिरकत कर रहे हैं।