देवताओं के शिल्पकार माने जाने वाले विश्वकर्मा जी की जयंती मंगलवार को शहरभर में मनाई गई। इस मौके पर लोगों ने मशीनों और औजारों की पूजा की। सरकारी और निजी कार्यालयों में विशेष पूजन हुआ।
माना जाता है कि समुद्र मंथन के दौरान उत्पन्न हुए रत्नों में से विश्वकर्मा भी एक थे। द्वारका और लंका का निर्माण इन्होंने ही किया था। मंगलवार को विश्वकर्मा जी का अवतरण दिवस मंदिरों और कार्यालयों में मनाया गया। भंडारी बाग स्थित विश्वकर्मा मंदिर में हर साल की तरह इस बार भी विशेष पूजन हुआ।
धीमान महासभा की ओर से शिवाजी धर्मशाला में विश्वकर्मा जयंती मनाई गई। इस मौके पर सुबह नौ बजे विश्वकर्मा पूजन और हवन किया गया। इसके बाद सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए। दोपहर में विशाल भंडारे का आयोजन हुआ।
पूजन के बाद मांगों को लेकर बैठक
उत्तराखंड पेयजल निगम के वाहन चालकों की ओर से मोहिनी रोड स्थित संघ भवन में विश्वकर्मा जी की पूजा की गई। सुबह आठ से साढ़े बारह बजे तक हवन हुआ। साढ़े बारह से डेढ़ बजे तक प्रसाद वितरण किया गया। इसके पश्चात वाहन चालक संघ की बैठक बुलाई गई। इस मौके पर चालकों की नौ मांगों पर चर्चा की गई। सभा को संबोधित करते हुए अनिल थापा ने कहा कि विभाग में रिक्त पद होते हुए भी कंडेक्टर से वाहन चलवाया जा रहा है। जबकि कंडेक्टर के पास ड्राइविंग लाइसेंस है तो उसको चालक के पद पर ही समायोजित कर दिया जाए। बैठक में सरजू थापा, हरपाल, राजेंद्र तोमर, कुंवर सिंह, गोपाल सिंह आदि उपस्थित थे।