शहर के एक नामी कालेज के कुंवर साहब इन दिनों काफी चर्चाओं में हैं। कुंवर साहब के पास अहम जिम्मेदारी है इसलिए छात्र नेताओं के लाडले भी खूब हैं।
इस प्यार मुहब्बत के बीच अक्सर साथी शिक्षकों के दिल में ईर्ष्या पैदा हो जाती है। कुंवर साहब का रवैया इस ईर्ष्या में आग में घी बन रहा है। साहब को साथी शिक्षक चाय या खाने पर बुलाते हैं तो वह साफ मना कर देते हैं।
अपनी कमंडली के बीच बैठकर, धाक के साथ बोलते हैं, ‘मैं किसी के खाने का भूखा नहीं, किसी को खाना है तो यहीं आ जाए।’ कुंवर साहब का मुंह में पान मसाला दबाकर बात करने का यह स्टाइल काफी चर्चाओं में है।