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देवभूमि का बेटा दुबई में खोलेगा पहला ग्रीन स्कूल

Tue, 02 Feb 2016 08:16 AM IST
आफताब अजमत/ अमर उजाला, देहरादून
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देश में ग्रीन स्कूल कांसेप्ट से अलग पहचान बनाने वाले उत्तराखंड के लाल वीरेंद्र रावत को अब विदेशों से बुलावा आने लगा है।
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हाल ही में दुबई में आयोजित कार्यक्रम में वीरेंद्र ने ग्रीन स्कूल कांसेप्ट बताया तो काफी पसंद किया गया। इसके बाद दुबई के अबुधाबी स्थित मयूर स्कूल को अरब देशों का पहला ग्रीन स्कूल खोलने का फैसला किया गया। वीरेंद्र की देखरेख में यह स्कूल तैयार किया जा रहा है। वहीं, वीरेंद्र रावत को हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में 31 मार्च को व्याख्यान देने के लिए बुलाया गया है।

टिहरी गढ़वाल के प्रतापनगर ब्लॉक के हेरवाल गांव निवासी मुकुंद सिंह रावत के बेटे वीरेंद्र रावत ने गुजरात सहित कई राज्यों में 100 से अधिक ग्रीन स्कूल खोले हैं। उन्हें गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस कांसेप्ट के लिए बधाई दी थी।
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बीते दिनों अमेरिका की बोस्टन यूनिवर्सिटी में आयोजित एनुअल समिट में ग्रीन स्कूल कांसेप्ट पर सम्मानित होने के बाद हाल ही में दुबई में आयोजित द नॉलेज एंड ह्यूमन डेवलपमेंट अथॉरिटी के कार्यक्रम में वीरेंद्र ने ग्रीन स्कूल पर आधारित शिक्षा पर लेक्चर दिया। इससे कार्यक्रम में शामिल विशेषज्ञ इतने प्रभावित हुए कि अबुधाबी में मयूर ग्रीन स्कूल खोलने की घोषणा हो गई।
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क्या है ग्रीन स्कूल कांसेप्ट

ग्रीन स्कूल कांसेप्ट प्रकृति के पांच तत्वों पृथ्वी, जल, हवा, आग और आकाश पर आधारित है। सामान्य स्कूलों से इतर इन स्कूलों में एंट्री करते ही आपको प्राकृतिक सुंदरता का अहसास होता है।

वीरेंद्र रावत ने ग्रीन स्कूलों के लिए अलग से सिलेबस डिजाइन किया है। इसमें पर्यावरण मित्र और उससे कमाई का रास्ता सिखाया जाता है। स्कूलों में कार्बन आधारित आधुनिक तकनीकों का प्रयोग किया जाता है। बारिश का 100 प्रतिशत पानी सभी प्रक्रियाओं में इस्तेमाल किया जाता है।

कूड़े से खाद बनाने और पेपर रिसाइक्लिंग से लेकर प्लास्टिक रिसाइक्लिंग तक का काम पढ़ाई के दौरान सिखाया जाता है। ग्रीन स्कूलों में बच्चे उद्यमिता के साथ पर्यावरण बचना और कमाई का जरिया भी सीखते हैं। वीरेंद्र ने बोस्टन में अपने लेक्चर में बताया कि ग्रीन स्कूलों में तीन वर्षों से न तो कोई छात्र बीमार हुआ न किसी शिक्षक ने बीमारी की वजह से छुट्टी ली।
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