फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जड़ी-बूटी उगाकर सालाना दो लाख तक कमा रहे दूरस्थ गांव के काश्तकार वीरेंद्र 

Wed, 11 Sep 2019 02:56 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal हेम कांडपाल, अमर उजाला, चौखुटिया (अल्मोड़ा)
विज्ञापन
- फोटो : प्रतीकात्मक तस्वीर
विज्ञापन

परंपरागत खेती के बजाय जड़ी-बूटी उत्पादन करके सल्ट ब्लॉक के दूरस्थ गांव मिझौड़ा के काश्तकार वीरेंद्र सिंह राणा सालाना दो लाख रुपये तक कमा रहे हैं। राणा बताते हैं कि शुरुआत में मुझे पागल कहने वाले लोग अब स्वयं इसे अपना रहे हैं।

विज्ञापन


जिले के दूरस्थ ब्लॉक सल्ट में वाया बासोट से मछोड़ होते हुए हरड़ा के निकट का गांव है मिझौड़ा। जड़ी बूटियों के प्रति आकर्षण के चलते राणा अपनी बीस नाली जमीन में जड़ी बूटियों की खेती कर रहे हैं। इनमें मुख्य रूप से सतावर, गिलोय, बड़ी इलायची, चंदन, तेजपत्ता और सर्पगंधा आदि शामिल है। राणा साल में डेढ़ से दो लाख रुपये कमा लेते हैं। फसल तैयार होने में दो से ढाई साल भी लग जाता है। वह कहते हैं कि जड़ी बूटी उत्पादन के लिए किसान में धैर्य होना जरूरी है। इस कार्य में उनकी पत्नी माधुली देवी का भी विशेष सहयोग मिलता है। 

सर्पगंधा पर दे रहे ध्यान
राणा का कहना है कि उन्होंने फिलहाल सर्पगंधा पर ध्यान देना शुरू कर दिया है। इसका एक किलो का दाम वर्तमान में सात सौ से एक हजार रुपये तक है। इसका उपयोग ब्लड प्रेशर की दवा में किया जा रहा है। 
विज्ञापन


जंगली जानवर भी नही करते नुकसान
राणा कहते हैं कि जड़ी बूटियों की खेती के लिए उन्हें जड़ी बूटी शोध संस्थान गोपेश्वर तथा भेषज संघ अल्मोड़ा से मार्गदर्शन और सहयोग भी मिलता है। अब तो गांव के कुछ अन्य लोगों ने भी इलायची की खेती शुरू कर दी है। जड़ी-बूटी को जंगली जानवर और बंदर आदि से भी नुकसान नही होता है।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें