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शहीदों के सम्मान में किये वादे आज भी अधूरे

Wed, 16 Dec 2015 02:00 PM IST
अरुणेश पठानिया/ अमर उजाला, देहरादून
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शहीद होने वाले सैनिकों के सम्मान में सरकार हर साल विजय दिवस और शौर्य दिवस पर बड़ी-बड़ी घोषणाएं करती है, लेकिन वह पूरी नहीं होती हैं।
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शहीदों की याद में हर जनपद में प्रेरण स्थल बनाने की 16 दिसंबर 2014 को हुई घोषणा तो दूर उससे पहले स्टेट वॉर मेमोरियल तक की घोषणा पूरी नहीं हुई। बुधवार को फिर गांधी पार्क के शहीद स्मारक पर वीर सैनिकों की शहादत को याद किया जाएगा, लेकिन पिछले विजय दिवस पर जो घोषणाएं की गईं थी वह आज भी अधूरी हैं।

उत्तराखंड सैन्य बहुल प्रदेश है, जिसकी 10 प्रतिशत आबादी पूर्वसैनिकों और आश्रितों की है। ऐसे में जांबाज सैनिकों की कुर्बानी को आने वाली पीढ़ी के लिए प्रेरणादायक बनाने के नाम पर घोषणाएं तो खूब होती हैं, लेकिन अमल कुछ पर ही किया जाता है।
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कभी घोषणाओं को पूरा करने के लिए भूमि नहीं मिलती तो कभी बजट आड़े आ जाता है। हालत यह है कि चालू वित्तीय वर्ष में विभाग ने दस करोड़ का अनुपूरक बजट प्रस्ताव रखा, लेकिन उसे डेढ़ करोड़ ही मिले, जिससे कल्याण योजनाएं प्रभावित हुईं।

इन वादों का क्या?
- राज्य का पहला स्टेट वॉर मेमोरियल
- शहीदों के नाम पर हर जनपद में बनने हैं प्रेरणा स्थल
- सरकारी स्कूलों और सड़कों का नाम शहीद सैनिकों के नाम
- अर्द्धसैनिक कल्याण के लिए विशेष बजट का प्रावधान
- हर जनपद में शहीद सैनिकों और पूर्वसैनिकों के बच्चों के लिए छात्रावास
- उल्लेखनीय सेवाओं के  सैन्य पदकों की धनराशि में बढ़ोतरी
- वीर नारियों के पुत्र विवाह के लिए वृद्धि की घोषणा प्रभावी नहीं
- आवासीय सहायता एक लाख से बढ़ाकर दो लाख करना
- एमबीबीएस, आईआईटी और आईआईएम में चयन पर एक लाख

विजय दिवस पर शहीद को देंगे श्रद्धाजंलि
भारतीय सेना की 1971 में पाकिस्तान को एक साथ पश्चिम और पूर्वी फ्रंट पर मात देने में उत्तराखंड के 248 रणबांकुरों ने प्राण न्यौछावर किए थे। इस युद्ध में उत्तराखंड के 74 सैनिक अलंकृत हुए, जिसमें 17 को मरणोपरांत सम्मान मिला है। बुधवार को शहीदों को श्रद्धांजली अर्पित करने के लिए सैनिक कल्याण महकमा गांधी पार्क में विजय दिवस कार्यक्रम आयोजित कर रहा है।
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सैनिक कल्याण निदेशक कर्नल अमिताभ नेगी (रिटायर्ड) ने बताया कि विजय दिवस पर सीएम हरीश रावत स्मारक पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजली अर्पित करेंगे। समारोह में शहीदों के आश्रितों और वीरता पदकों से सम्मानित सैनिकों को सम्मानित किया जाएगा।

साल 1971 में शहीद और अलंकृत सैनिक
शहीद - 248
युद्ध अपंग - 78
वीरता पदक विजेता (मरणोपरांत) - 17
वीरता पदक विजेता (जीवत)- 57
महावीर चक्र विजेता - 5
वीर चक्र विजेता - 31
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