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विजय बहुगुणा, हरक सिंह रावत दगाबाज: सीएम रावत

Thu, 03 Nov 2016 10:20 AM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
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साक्षात्कार के दौरान सीएम हरीश रावत - फोटो : AmarUjala
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विधानसभा चुनाव नजदीक आने के साथ ही मंत्रियों, नेताओं के बीच बयानबाजी का दौर तेज हो गया है। सीएम हरीश रावत ने पूर्व सीएम विजय बहुगुणा और पूर्व मंत्री हरक सिंह रावत को दगाबाज करार देते हुए कहा है कि दोनों ने ऐसे वक्त में पार्टी और उनका साथ छोड़ा, जब उनकी सख्त जरूरत थी।
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रावत ने कहा कि मुझसे यह गलती हुई कि मैने पूर्व सीएम बहुगुणा और हरक सिह रावत का साथ दिया। कहा कि जब बहुगुणा चुनाव हार गए थे तो उत्तरकाशी और टिहरी में उनकी कोई स्वीकार्यता नहीं थी। बतौर प्रदेश अध्यक्ष मैं उन्हें जनता के बीच ले गया। पार्टी पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं से जिंदाबाद के नारे लगवाए और बाद में वह राज्य के मुख्यमंत्री बने।

रावत ने हरक भी हमला बोला। कहा कि वह बहुत पहले भाजपा में जाने की कोशिश कर रहे थे। लेकिन वरिष्ठ होने के नाते मैंने उन्हें भाजपा में जाने से रोका। उन्हें सलाह दी कि नौजवान हो, भाजपा में जाकर अपना राजनीतिक भविष्य बर्बाद मत करो।
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सीएम रावत ने कहा कि सच्चे कांग्रेसी अच्छे और बुरे दोनों वक्त में पार्टी का दामन कतई नहीं छोड़ते है। पूर्व सीएम बहुगुणा और पूर्व मंत्री रावत के पार्टी छोड़ने से साफ जाहिर है कि दोनों सच्चे कांग्रेसी थे ही नहीं।  

कांग्रेस ने दरवाजा खोला था तभी तो हम बाहर आए
कांग्रेस की प्रदेश प्रभारी अंबिका सोनी द्वारा बागी विधायकों के लिए पार्टी के दरवाजे खुले होने संबंधी बयान पर पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने कहा कि कांग्रेस ने जब दरवाजे खोले थे तभी तो वे बाहर आए। अब पार्टी का दरवाजा खोलने से क्या फायदा? कांग्रेस को तो अपना दरवाजा बंद कर लेना चाहिए। दरवाजा खोलकर रखेंगे तो और लोग बाहर चले जाएंगे।

अंबिका सोनी के बयान के बारे में बहुगुणा ने पूछा गया तो उन्होंने कहा कि अब दरवाजा खोलने या बंद करने से क्या फायदा? जब हम लोगों ने मुख्यमंत्री हरीश रावत पर अंकुश लगाने की बात कही थी तो पार्टी ने हमारी अनदेखी की। पार्टी ने हरीश रावत पर अंकुश लगाना सही नहीं समझा।

अब हम लोग जहां हैं, खुश हैं। उन्होंने कहा कि विधानसभा अध्यक्ष द्वारा अपने विवेकाधीन कोष का राजनीतिक उद्देश्य के लिए इस्तेमाल किया जाना गंभीर मामला है। पूरे मामले की जांच होनी चाहिए। बहुगुणा ने कहा कि विधानसभा अध्यक्ष के पास तो विवेकाधीन कोष होना ही नहीं चाहिए।

विधानसभा अध्यक्ष का पद संवैधानिक पद है। इस पर बैठे व्यक्ति को निष्पक्ष तरीके से काम करना चाहिए। उन्होंने कहा कि कई राज्यों में विधानसभा अध्यक्ष के पास विवेकाधीन कोष का अधिकार नहीं है। उत्तराखंड में भी यह व्यवस्था समाप्त होनी चाहिए।

कांग्रेस के साथ तो हरीश रावत ने की है दगाबाजी: हरक
मुख्यमंत्री हरीश रावत द्वारा विजय बहुगुणा और हरक सिंह रावत को दगाबाज बताए जाने पर हरक ने पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि पार्टी में रहकर दगाबाजी करना तो कोई हरीश रावत से सीखे। हरीश रावत ने किसको छोड़ा है? एनडी तिवारी, विजय बहुगुणा और यशपाल आर्य के साथ दगाबाजी किसने की? उन्होंने कहा कि जब वह प्रतिपक्ष के नेता थे तो हरीश रावत ने उनको भी तंग करने में कोई कसर नहीं छोड़ रखी थी।

हरक ने कहा कि 2012 के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस 40 से अधिक सीटें लाती, लेकिन हरीश रावत की वजह से यह आंकड़ा 32 पर आकर टिक गया। कई विधानसभा सीटों पर हरीश रावत ने अपने समर्थकों को निर्दलीय चुनाव लड़वाया। कई जगह पर भीतरघात भी किया। हमने पार्टी के साथ कभी भीतरघात नहीं किया।

हमें जब लगा कि अब हम पार्टी में नहीं रह सकते हैं तो हमने पार्टी छोड़ दी। हरक ने कहा कि विधानसभा चुनावों में संभावित हार को देखकर हरीश रावत बौखला गए हैं। इसी वजह से वह ऐसी बातें कर रहे हैं। हरीश रावत ने जैसा बोया है वैसा ही काटेंगे।
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