उत्तराखंड में उपलब्ध जल के बेहतर इस्तेमाल के लिए इसकी उपलब्धता और इस्तेमाल का आंकड़ा जुटाया जाएगा।
इन आंकड़ों की मदद से जल के इस्तेमाल से अर्थव्यवस्था को सुधारने के साथ-साथ बाढ़ से बचाव के तरीके विकसित किए जाएंगे। उपलब्ध पानी, बारिश और नदियों के मार्फत होने वाले पानी के बहाव का आंकड़ा नेशनल हाइड्रोलॉजी प्रोजेक्ट के तहत जुटाया जाएगा। इसके लिए रुड़की में राज्य जल सूचना केंद्र की स्थापना की जाएगी।
केंद्र सरकार ने विश्व बैंक की मदद से पूरे देश में नेशनल हाइड्रोलॉजी प्रोजेक्ट लागू करने की योजना बनाई है। देश के 26 राज्यों में यह प्रोजेक्ट लागू हो चुका है। उत्तराखंड में अभी तक प्रोजेक्ट लागू नहीं था। 27 अक्तूबर को कैबिनेट की मीटिंग में उत्तराखंड में भी नेशनल हाइड्रोलॉजी प्रोजेक्ट लागू करने की मंजूरी दे दी गई।
इसके बाद अब प्रोजेक्ट को लेकर केंद्र सरकार के साथ आपसी समझौता पत्र (एमओयू) पर हस्ताक्षर किया जाएगा। इस प्रोजेक्ट को आठ साल के लिए लागू किया गया है। प्रदेश में प्रोजेक्ट पर लगभग 75 करोड़ रुपये खर्च आएगा। इसमें केंद्र सरकार और विश्व बैंक की हिस्सेदारी 50-50 फीसदी की होगी।
प्रोजेक्ट के लागू होने के बाद नदियों से होने वाले पानी के बहाव, बारिश और मौसम संबंधी आंकड़ा एकत्र किया जाएगा। इन आंकड़ों के आधार पर प्रदेश में जल संसाधन के बेहतर इस्तेमाल और बाढ़ से बचाव की नीति बनाई जाएगी। इस प्रोजेक्ट में सतही जल के साथ-साथ भूमिगत जल को शामिल किया जाएगा।