उत्तराखंड के मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने शुक्रवार (31 जनवरी) को अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। इस्तीफे से एक दिन पहले बहुगुणा अपने काम 'निपटाते' रहे। इस्तीफे से एक दिन पहले यानि गांधी जी की पुण्यतिथि (30 जनवरी) पर बहुगुणा राजधानी देहरादून में ही थे।
इस दिन मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा एक तरफ अपने भविष्य की तैयारियों में लगे रहे तो अपने पुराने वादे भी वो निपटाते रहे। हालांकि गांधी जयंती के कार्यक्रम में मुख्यमंत्री की बॉडी लैंग्वेज ने समर्थकों को भी आभास करा दिया था कि उनका 'समय पूरा' हो गया है।
विदाई से पहले किया घर का बंदोबस्त
गुरुवार को जिस वक्त विजय बहुगुणा की सीएम की कुर्सी खिसकने या बरकरार रहने को लेकर बुद्धिजीवी दुविधा में था कमोबेश उसी समय बहुगुणा ने सीएम पद से हटने के बाद अपने रहने का बंदोबस्त कर लिया था।
सीएम पद से हटने के बाद बहुगुणा का निवास बीजापुर अतिथिगृह के बगल में पुराना गेस्ट हाउस होगा। उन्होंने सीएम की हैसियत से इस फाइल को मंजूरी दे दी है।
यह पहली बार हुआ कि मुख्यमंत्री पद से हटने के कई दिन पहले यदि विजय बहुगुणा ने कुछ खास मुद्दों पर फोकस किया तो उनमें एक खुद की रिहायश का भी था। पद से हटने के बाद फिर शासन ना जाने आवास का बंदोबस्त कहां करे, इसलिए अपनी व्यवस्था खुद ही कर ली।
खूब 'निपटाई' फाइलें
सचिवालय में गुरुवार को माहौल की करवटें बदलती रही। नेताओं की नजर और नजारा बदला हुआ दिखा। हर रोज हुंकार भरने वाले आज मायूस थे। सीएम के खांटी समर्थक विधायक व नेताओं के चेहरे उतरे हुए थे।
चर्चा के अनुरूप गुरुवार के दिन को मौजूदा सरकार का आखिर दिन मानकर तेजी के साथ काम कराए जा रहे थे। देर शाम तक अपर मुख्य सचिव के कार्यालय में जमावाड़ा लगा रहा।
चतुर्थ तल पर मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने काफी समय बिताया लेकिन हर रोज जैसी हलचल नहीं थी। सचिवालय में नियमित तौर पर आने वाले विधायक सुबोध उनियाल, विजयपाल सजवाण, राजकुमार व उमेश काऊ काफी समय तक जमे रहे।
कुछ देर के लिए डिप्टी स्पीकर अनुसुईया प्रसाद मैखुरी भी आए लेकिन जल्द ही खिसक लिए। इससे पहले कैबिनेट मंत्री यशपाल आर्य व प्रीतम सिंह ने सचिवालय में सुबह पहुंचकर मुख्यमंत्री से मुलाकात की। लेकिन सीएम विजय बहुगुणा के समर्थक विधायकों के चेहरों पर चिंता की लकीरें थीं।
नेताओं से किया वादा निभाया
गुरुवार को नेताओं को दायित्व बांटने का सिलसिला जारी रहा। मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने पार्टी के चार नेताओं को एडजस्ट किया। सीएम ने मेयर का टिकट मिलने से वंचित रहे अशोक वर्मा से किया गया वायदा भी पूरा किया।
कांग्रेस नेता विवेकानंद खंडूड़ी को उद्योग मित्र परिषद के उपाध्यक्ष के पद पर नियुक्त किया है। नगर निगम के चुनाव में मेयर का टिकट मिलने से वंचित रह गए अशोक वर्मा से किया गया वायदा भी मुख्यमंत्री ने पूरा किया।
टिकट नहीं मिलने पर सीएम ने उस वक्त कहा था कि वर्मा को पिछड़ा वर्ग आयोग में उपाध्यक्ष बनाया जाएगा। लेकिन काफी दिन बाद आज इसका आदेश भी जारी हुआ।
कांग्रेस नेता बलबीर सिंह नेगी को योजना आयोग का सलाहाकार नियुक्त किया गया है। इसके अलावा अल्पसंख्यक आयोग में उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी कांग्रेसी नेता अनवार अहमद को दी गई है।