राजधानी दून के साथ ही हरिद्वार, ऋषिकेश, रुड़की, विकासनगर में छात्र-छात्राओं को स्कूली बसों और वैन में सुरक्षित यात्रा कराई जा सके, इसके लिए परिवहन विभाग की ओर से बसों, वैन का ऑडिट शुरू किया गया है। परिवहन विभाग की टीमें स्कूली बसों और वैन को सड़कों पर चेक करने के बजाय अब खुद स्कूलों में जाकर मानकों की जांच कर रही हैं।
विभागीय टीमें सुप्रीमकोर्ट के आदेशों के पालन में सीबीएसई बोर्ड की ओर से स्कूली वैन-बस को लेकर जारी गाइडलाइन के मुताबिक जांच कर रही हैं। आरटीओ (प्रवर्तन) सुनील शर्मा ने बताया कि पहले चरण में देहरादून के अलावा हरिद्वार, ऋषिकेश, रुड़की, हरिद्वार में स्कूलों में जाकर 400 गाड़ियों का ऑडिट किया जा चुका है। परिवहन मानकों के साथ ही सीबीएसई बोर्ड की ओर से जारी गाइडलाइन के मुताबिक संचालित नहीं की जा रही स्कूली बसों और वैन को चिह्नित कर गाड़ियों के संचालकों को नोटिस जारी करने के साथ ही संचालन पर रोक लगाई जा रही है। पहले चरण में ऐसी 25 स्कूली बसों के संचालन पर रोक लगाई गई है। शर्मा ने बताया कि परिवहन विभाग के साथ ही सीबीएसई बोर्ड की ओर से स्कूली बसों और वैन को लेकर तमाम मानक निर्धारित किए गए हैं।
ऑडिट में यह बात सामने आ रही कि कई स्कूली वैन और बसों के संचालकों द्वारा निर्धारित प्रावधानों का पालन नहीं किया जा रहा है। हालांकि, जिन स्कूली गाड़ियों और बसों के संचालन पर रोक लगाई गई, उससे छात्र-छात्राओं के साथ ही अभिभावकों को थोड़ी दिक्कत हो रही हैं, लेकिन सवाल बच्चों की सुरक्षा का है, ऐसे में सुरक्षा को दरकिनार नहीं किया जा सकता है। शर्मा का कहना है कि सिर्फ उन्हीं स्कूली बसों और वैन को संचालित करने की अनुमति दी जाएगी, जो सीबीएसई बोर्ड की ओर से जारी गाइडलाइन के मुताबिक संचालित की जा रही हैं।
स्कूली बसों के निर्धारित मानक
बसों का रंग पीला होना चाहिए, बसों पर स्कूल के नाम के साथ प्रधानाचार्य का मोबाइल नंबर, लैंडलाइन नंबर अंकित हो, बस में इमरजेंसी दरवाजों के साथ ही अग्निशमन उपकरणों की व्यवस्था जरूरी है, बसों में स्पीड गवर्नर जरूरी है, बसों की गति 40 किमी प्रति घंटे से अधिक नहीं होगी, खिड़कियों पर जालियां लगी होगी ताकि बच्चे शरीर का कोई अंग बाहर न निकाल सकें, बसों और वैन में फर्स्ट एड बॉक्स लगाना अनिवार्य होगा, हर बस में स्कूल का एक शिक्षक बच्चों के साथ सफर करेगा, जो यह सुनिश्चित करेगा कि सुरक्षा मानकों की अनदेखी तो नहीं की जा रही, बच्चे आसानी से सवार हो सके इसके लिए बसों को लोफ्लोर बनाया जाएगा, बसों के चालक-परिचालक ड्रेस में होंगे।
स्कूली बसों और वैन में बच्चों की सुरक्षित यात्रा को लेकर देहरादून, हरिद्वार, रुड़की, ऋषिकेश में बसों और वैन का ऑडिट किया जा रहा है। टीमें स्कूलों में जाकर गाड़ियों का आडिट कर रही हैं। तमाम मानकों पर गाड़ियों का परीक्षण किया जा रहा और जो मानकों के मुताबिक नहीं पाई जा रहीं, ऐसी गाड़ियों के संचालन पर रोक लगाई जा रही है। गाड़ियों का संचालन मानकों के अनुरूप हो, इसके लिए प्रधानाचार्य को भी अवगत कराया जा रहा है।
- सुनील शर्मा, आरटीओ (प्रवर्तन) देहरादून।