पहाड़ी लोक संगीत, पहाड़ी जीवन था पसंद
ऐसा नहीं था कि उन्हें मौके नहीं मिल रहे थे, लेकिन उनकी नजर में मौके के मायने दूसरे थे। उन्हें स्तरीय अवसरों की तलाश थी। उन्हें वैसा मौका चाहिए था, जैसा कभी गुड्डी फिल्म के लिए संगीतकार वसंत देसाई ने उन्हें प्रदान किया था। या फिर मीरा फिल्म के लिए पंडित रवि शंकर उनके लिए तलाश करके लाए थे।
लता मंगेशकर, आशा भोंसले, अनुराधा पौंडवाल, कविता कृष्णामूर्ति, अनुपमा देशपांडे, सुषमा श्रेष्ठ जैसी बाॅलीवुड गायिकाओं की तरह वाणी जयराम कभी उत्तराखंड के लोक संगीत से नहीं जुड़ पाईं, लेकिन उन्हें पहाड़ी लोक संगीत, पहाड़ी जीवन, पहाड़ सब कुछ बहुत पसंद था।
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बातचीत में उन्होंने अपनी इस पसंद को खुलकर बताया भी था। उनके मिलनसार और सरल स्वभाव का इससे बड़ा उदाहरण और क्या हो सकता है कि जब उनसे अनुरोध किया गया, तो वह झट से गुनगुनाने को तैयार हो गईं थीं। उन्होंने तब गुनगुनाया था-बोले रे पपीहरा।