जंगल, जैव विविधता और इको सिस्टम की सुरक्षा के लिए उत्तराखंड सरकार पचास फीसदी वन पंचायतों की कमान महिलाओं के हाथ सौंपने जा रही है।
प्रदेश में 12 हजार वन पंचायतें हैं, इनकी आधी सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित की जा रही हैं। वन पंचायतों को और मजबूत बनाने के लिए पहली बार कैंपा, जायका समेत प्रदेश सरकार की अन्य योजनाएं एक साथ वन पंचायतों में लागू की जाएंगी। संबंधित क्षेत्रों में विकास कार्य इन्हीं वन पंचायतों के माध्यम से कराए जाएंगे।
महिला सशक्तीकरण के लिए वन पंचायतों के सरपंच की 50 फीसदी सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित करने के साथ शासन जायका (जापानीज इंटरनेशनल कोआपरेटिव एजेंसी) की उत्तराखंड फोरेस्ट रिसोर्स मैनेजमेंट प्रोजेक्ट, मुख्यमंत्री वन पंचायत सुदृढ़ीकरण योजना, मुख्यमंत्री चारागाह विकास योजना, उत्तराखंड वन संसाधन प्रबंध परियोजना लागू करने की जिम्मेदारी वन पंचायतों को दे रही है।
पहली बार वन पंचायतों के लिए उठाया कदम
वन पंचायतों के हाथों में वनों के अंदर की सड़कों का निर्माण, मानव-वन्य जीव संघर्ष रोकने, वनीकरण समेत आदि जिम्मेदारी रहेगी। पंचायतों के माध्यम से ही रोजगार के अवसर विकसित किए जाएंगे।
वनाधिकारियों ने बताया कि उत्तराखंड पहला प्रदेश रहा है जहां ब्रिटिश हुकूमत ने वन पंचायतों की व्यवस्था वर्ष 1931 में की थी। वर्ष 2005 में वन पंचायत नियमावली बनी, लेकिन पहली बार सरकार ने वन पंचायतों को मजबूत करने के दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है।
प्रमुख वन संरक्षक (वन पंचायत) राजेंद्र कुमार ने बताया कि महिलाओं को सरपंची में आरक्षण देने के साथ महिलाओं में क्षमता विकास तथा अन्य कार्यों में उनकी अधिक से अधिक सहभागिता सुनिश्चित की जाएगी। पहली बार सारी योजनाओं को एक साथ वन पंचायतों में लाया जा रहा है।
खास
सरकार वन पंचायत सलाहकार समिति का गठन कर दिया है
वन पंचायत के सरपंच के लिए आठ सदस्यीय कमेटी बनेगी
वन पंचायत क्षेत्र में शेल्टर, इमरजेंसी सेंटर बनाए जाएंगे
कुमाऊं मंडल में 21 सितंबर को वन पंचायत सम्मेलन प्रस्तावित है
स्टेट फोरेस्ट डवलपमेंट एजेंसी ने काम शुरू किया