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स्कूल भेजने में कट रही पापा की जेब

Fri, 02 Aug 2013 09:50 AM IST
देहरादून/ब्यूरो
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बच्चों को वैन से स्कूल भेजना माता-पिता की जेब काटने लगा है। आलम यह है कि कई अभिभावकों को तो स्कूल फीस से ज्यादा रकम वैन की व्यवस्था करने में चुकानी पड़ रही है। दूसरी ओर, पुलिस के मुकदमा दर्ज करने की चेतावनी के बावजूद शहर के स्कूल प्रबंधन अपने वाहनों की व्यवस्था करने पर गंभीर नहीं हैं। वहीं, अभिभावकों की परेशानी की भी कोई सुध नहीं ले रहा।
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शहर के बड़े स्कूलों को छोड़ दें तो ज्यादातर स्कूलों में प्रतिमाह शुल्क अधिकतम 1500 रुपये है। अभी तक अभिभावक बच्चों के स्कूल आने-जाने के लिए पांच सौ से आठ सौ रुपये तक वैन संचालकों को दे रहे थे, लेकिन अब वैन संचालकों ने यह खर्चा बढ़ाकर 1500 रुपये तक कर दिया है।

जेब पर अचानक बढ़े इस बोझ ने अभिभावकों को परेशान कर दिया है। जन संगठन के अध्यक्ष कुलदीप चौधरी ने बृहस्पतिवार को साईं ग्रेस एकेडमी के मैनेजिंग डायरेक्टर समरजीत के समक्ष यह समस्या उठाई। उन्होंने जिला प्रशासन से स्कूल प्रबंधनों को वाहनों की व्यवस्था करने का दबाव बनाने की मांग भी की।
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वैन संचालक चाह रहे नियमों में ढील
वैन परमिट लेने के लिए परिवहन विभाग की ओर से जारी नियमों में वैन संचालक ढील चाहते हैं। बृहस्पतिवार को स्कूल वैन एसोसिएशन के प्रतिनिधिमंडल ने संरक्षक और कांग्रेस नेता सूर्यकांत धस्माना के नेतृत्व में आरटीओ डीसी पठोई से मुलाकात की। उन्होंने गाड़ी के रंग में बदलाव नहीं करने, वाहन की आयु सीमा 15 वर्ष करने, बच्चों की संख्या निर्धारित करने, वर्तमान संगठन में शामिल सभी गाड़ियों को परमिट देने की मांग की।

बताया गया कि आरटीओ ने इन मांगों पर मौखिक सहमति जताई, लेकिन स्कूल वैन को स्कूल समय के अलावा अन्य व्यवसाय में चलाने और पांच और सात सीटर ओम्नी वैन को एक ही क्लास में परमिट देने पर बात नहीं बनी। मुलाकात करने वालों में एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष राजीव बजाज, महामंत्री बीएस राणा, घनश्याम शर्मा, राजेंद्र शर्मा, आकाश गोयल, नीरज थापा आदि शामिल रहे।
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