युवाओं को साहित्य से जोड़ना बहुत जरूरी
फेस्टिवल के निदेशक व पूर्व आईएएस डॉ. संजीव चोपड़ा ने कहा, युवाओं को साहित्य व लेखन से जोड़ना बहुत जरूरी है। जब युवा साहित्य को पढ़ेंगेे तभी हम हिंदी साहित्य में वर्णित इतिहासकारों की रचना को समझ पाएंगे। साथ ही उन्होंने कहा, बीते कुछ सालों में साहित्य व लेखन के प्रति युवाओं करी रूचि बढ़ी है।
साहित्य और राजनीति को अलग करके न देखा जाए : निशंक
फेस्टिवल के एक सत्र में पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री डाॅ. रमेश पोखरियाल निशंक ने कहा, साहित्य और राजनीति को अलग करके देखने की आवश्यकता नहीं है। हिंदी का साहित्य अपने स्वर्णिम काल की ओर अग्रसर है। जीवन संघर्ष और साहित्य सृजन विषय पर आयोजित सत्र में डॉ. निशंक ने कहा, राजनीति में रहते हुए उन्होंने कभी किसी पद से प्रेम नहीं किया। इसलिए किसी पद का रहना या न रहना उनके लिए बाधक नहीं होता। उन्होंने केदारनाथ त्रासदी पर आधारित अपनी पुस्तक का हवाला देते हुए कहा, संवेदनाओं पर राजनीति का कोई प्रभाव नहीं पड़ता। वे जैसी हैं वैसी ही रहती है। डॉ. सुशील उपाध्याय की ओर से संचालित इस सत्र में डॉ. बुद्धिनाथ मिश्र, डॉ. प्रमोद भारती, डॉ. राम विनय, डॉ. सविता मोहन, समेत कई वरिष्ठ साहित्यकार भी मौजूद रहे।
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युवाओं में दिखा खासा उत्साह
दो दिवसीय फेस्टिवल में विभिन्न स्कूल व कॉलेज के छात्रों में खासा उत्साह देखने को मिला। युवाओं ने विभिन्न सत्रों में बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया। वहीं इस मौके पर आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम में युवाओं ने कथक व नृत्य की मनमोहक प्रस्तुति से खूब तालियां बटोरी। फेस्टिवल में लगे बुक स्टॉल पर लोगों ने जमकर खरीदारी भी की।
धरती को बचाने के लिए यह है ब्लैक कार्बन आंदोलन का समय
फेस्टिवल के लुकिंग बियोंड चिपको सत्र में पर्यावरण व जलवायु परिवर्तन पर चर्चा की गई। प्रसिद्ध पर्यावरणविद पद्मभूषण चंडी प्रसाद भट्ट, के साथ डाॅ. पीएस नेगी व रुचि बडोला ने ग्लेशियरों के सिकुड़ने, पर्यावरण में फैल रहे ब्लैक कार्बन के बारे में विस्तार से बात की। उन्होंने कहा, धरती को बचाने के लिए चिपको आंदोलन की तरह ब्लैक कार्बन आंदोलन करने का समय आ गया है।
पद्मभूषण चंडी प्रसाद भट्ट ने कहा, हाल ही हमने कई बड़ी प्राकृतिक आपदाओं का सामना किया है, दिनोंदिन यह समस्या बढ़ती जा रही है। ऐसे में इन समस्या से बाहर निकलने के लिए चिंतन करने की जरूरत है। रुचि बडोला ने कहा, पहाड़ों में जो विकास हो रहा है उसके परिणाम हम आए दिन देख रहे हैं।
वहीं, डाॅ. पीएस नेगी ने कहा, वर्तमान में वातावरण में मौजूद ब्लैक कार्बन की वजह से उत्पन्न जलवायु परिवर्तन की चुनौती क्षेत्रीय, राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता का विषय बन गया है। जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण की समस्याओं से निपटने के लिए हमें एक बार फिर से चिपको आंदोलन की तरह ब्लैक कार्बन से वातावरण तापमान वृद्धि-ग्लोबल वार्मिंग रोकने के लिए जन आंदोलन करने की जरूरत है।