जेपी जोशी यौन शोषण प्रकरण में निलंबित संयुक्त सचिव सुमन सिंह वल्दिया और युवक कांग्रेस की पूर्व प्रदेश महासचिव रितु कंडियाल की जमानत याचिका जिला सत्र न्यायालय ने खारिज कर दी। अब दोनों हाईकोर्ट में प्रार्थनापत्र देने की तैयारी में हैं।
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जिला जज राम सिंह की अदालत में बृहस्पतिवार को वल्दिया और रितु के मामले की याचिका पर अलग-अलग बहस हुई।
एफआईआर में नहीं है नाम
वल्दिया ने अपने प्रार्थनापत्र में कहा कि एफआईआर में उनका नाम नहीं है। प्रमोशन के लिए कोई षड्यंत्र रचने की बात से इनकार करते हुए वल्दिया ने झूठा फंसाने का आरोप लगाया।
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अभियोजन ने विरोध करते हुए कहा कि ब्लैकमेलिंग के एक आरोपी नीरज चौहान ने अपने बयानों में वल्दिया से समझौते की बात कही है।
मुकदमें में देरी का तर्क
वहीं रितु के अधिवक्ता ने कहा कि जिन धाराओं में पुलिस ने मामला दर्ज किया है, उन धाराओं का अपराध नहीं है। मामले में एफआईआर भी देरी से दर्ज हुई है।
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अधिवक्ता ने कहा कि रितु ने न तो वादिनी को धमकाया न ही किसी अपराध के लिए उकसाया। उसने मुख्य अभियुक्त को वादिनी का शारीरिक शोषण करने के लिए प्रेरित नहीं किया। अभियोजन पक्ष की ओर से जमानत दिए जाने का विरोध किया गया। अदालत ने दोनों की याचिका खारिज कर दी।
रितु ने दिया शादी का हवाला
रितु ने अपनी जमानती प्रार्थनापत्र में कहा कि वह 15 दिसंबर से जेल में बंद है। इससे उसका नवविवाहित जीवन क्लेशमय हो गया है। उसने सामाजिक कार्यकत्री और प्रतिष्ठित राजनीतिक संगठन की सदस्य होने के आधार पर भी जमानत की मांग की।