उत्तराखंड में आई आपदा ने पूरे प्रदेश का नक्शा बिगाड़ दिया है। प्रशासन और स्थानीय लोग इससे लगातार जूझ रहे हैं। करीब 4 महीने बाद सरकार ने आपदा से हुए नुकसान के मुल्यांकन के लिए टीम बनाई है।
टीम केदारनाथ रवाना
इसके लिए केदारनाथ धाम सहित पैदल मार्ग पर दैवी आपदा से क्षतिग्रस्त परिसपंत्तियों के वृहद सर्वेक्षण और मूल्यांकन हेतु जिलाधिकारी डा. राघव लंघर के नेतृत्व में विभिन्न विभागों के अधिकारियों की टीम केदारनाथ रवाना हो गई है। टीम सोमवार से धाम में वार्डवार मूल्यांकन करेगी।
सरकारी परिसंपत्तियां भी क्षतिग्रस्त
16 और 17 जून को आए जलप्रलय से नगर पंचायत केदारनाथ, गरुड़चट्टी, घिनुरपाणी, रामबाड़ा, गौरीकुंड और सोनप्रयाग में काफी संख्या में निजी परिसंपत्तियां, होटल, ढाबे, दुकान, धर्मशाला, लॉज और सरकारी परिसंपत्तियां क्षतिग्रस्त हो गई थीं। अभी तक प्रभावितों के मुआवजा संबंधी प्रकरणों का निस्तारण नहीं हो पाया है।
विगत माह राजस्व, सिंचाई और लोनिवि की संयुक्त टीम द्वारा क्षतिग्रस्त परिसंपत्तियों का प्रारंभिक सर्वेक्षण कर लिया गया है। अब प्रभावित लोगों और विभागीय अधिकारियों की मौजूदगी में व्यापक सर्वेक्षण किया जा रहा है।
डीएम डा. लंघर ने बताया कि प्रभावित भवन स्वामियों को क्षति के सापेक्ष मानकों के तहत राहत सहायता राशि वितरण की जानी है।
इससे पूर्व केदारनाथ, घिनुरपाणी और गरुड़चट्टी में राजस्व, सिंचाई, लोनिवि नगर पंचायत और जिला पंचायत की संयुक्त टीम द्वारा वृहद सर्वेक्षण किया जा रहा है। इस सर्वेक्षण में भवन स्वामी भी अभिलेख/साक्ष्यों सहित मौजूद रहेंगे। ताकि किसी प्रकार की आपत्ति और दावों का मौके पर ही निस्तारण हो जाए।