मनेरी भाली-2 की 16 किमी टनल में 500 मीटर था ऐसा हिस्सा
डॉ. पीसी नवानी ने बताया कि उत्तरकाशी की मनेरी भाली-2 परियोजना की 16 किमी की टनल का निर्माण उनकी निगरानी में हुआ था। इस सुरंग में 500 मीटर का हिस्सा ऐसा था, जिसे ''श्रीनगर थ्रस्ट'' बोलते हैं। बताया कि इस हिस्से की मिट्टी बेहद भुरभुरी थी, जो जरा सी ड्रिल पर नीचे जा रही थी। लिहाजा, उसी हिसाब से डिजाइन पैटर्न में बदलाव करके काम किया गया, जो कि बिना रुकावट के पूरा हुआ।
टनल व्यास के तीन गुना ऊंचाई तक का हिस्सा ही संवेदनशील
डॉ. पीसी नवानी ने बताया कि सुरंग के कुल व्यास के ऊपर का तीन मीटर हिस्सा ही संवेदनशील होता है। इसके गिरने-धंसने का खतरा रहता है। इससे ऊपर कोई खतरा नहीं है। कमजोर हिस्से के हिसाब से ही सपोर्ट देना पड़ता है।
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सुरंगों से हिमालय को खतरा नहीं
विशेषज्ञ डॉ. नवानी ने बताया कि सुरंगों से हिमालय को कोई खतरा नहीं है। सुरक्षित तरीके से टनल निर्माण होने के बाद ये 100 से 150 साल तक चलती है। जबकि सामान्य तौर पर सड़कें हर साल आपदा में टूट जाती हैं।