27 नवंबर
- सुरंग के दूसरे छोर पर
यहां टीएचडीसी सुरंग के भीतर माइक्रो टनल बना रहा है, जिसका अभी तक केवल 12 मीटर हिस्सा बना है, जबकि सुरंग के ऊपर ओएनजीसी 324 मीटर वर्टिकल ड्रिल करेगा, जिसकी मशीन पहुंचाने के लिए सड़क पूरी नहीं हो पाई है। अभी तक पांच में से केवल 1.2 किमी तक ही सड़क बन पाई है।
- सिलक्यारा छोर के ऊपर
सिलक्यारा छोर के ऊपर एसजेवीएन 1.2 मीटर व्यास की ड्रिल कर रहा है। खबर लिखे जाने तक 36 मीटर ड्रिल हो चुकी थी। अब 50 मीटर का सफर तय करता है, जिसमें करीब 100 घंटे का समय लग सकता है। लिहाजा, यहां 30 नवंबर तक कामयाबी मिल सकती है।
- सिलक्यारा छोर के बराबर
यहां से ड्रिफ्ट टनल बनाने का प्लान तैयार हो चुका है, जिस पर काम शुरू होने वाला है। अगर यह टनल बनती है तो इससे अपेक्षाकृत कम समय में मजदूरों तक पहुंच बन सकती है।
- मैन्युअल खोदाई
श्रमिकों को सुरक्षित निकालने के लिए छह सदस्यीय रैट माइनर्स की टीम भी पहुंची है। सोमवार शाम सात बजे सेना की मदद से टीम ने हाथ से खोदाई शुरू कर दी।
28 नवंबर
रैट माइनर्स की टीम ने सुरंग में खुदाई की और करीब 12 मीटर तक पाइप डालकर श्रमिकों को सुरक्षित निकाला।