घर में कितने दिन बैठा रहता, काम तो करना ही पड़ेगा। जोखिम तो हर जगह है, जिधर भी काम करेंगे। यह कहना है पश्चिम बंगाल के हुगली निवासी सोविक पाखिरा का। सोविक उन श्रमिकों में से एक है जो सिलक्यारा सुरंग में भूस्खलन हादसे के बाद 17 दिन तक सुरंग में फंसे रहे थे।
यमुनोत्री हाईवे पर निर्माणाधीन सिलक्यारा-पोलगांव सुरंग निर्माण को अनुमति मिलने के बाद श्रमिकों के धीरे-धीरे लौटने का सिलसिला जारी है। इन श्रमिकों में से वह भी है जो हादसे के दौरान सुरंग के अंदर फंस गए थे। अब तक ऐसे तीन श्रमिक काम पर वापस लौटे हैं। इनमें से एक 25 वर्षीय पेशे से इलेक्टि्रशियन सोविक पाखिरा ने बताया कि जब वह सुरंग के अंदर फंसे तो पहले दिन तो घबरा गए थे। लेकिन जब बाहर से बातचीत शुरू हुई तो खुद को संभाला।
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छुट्टी के दौरान वह रिश्तेदारों के यहां गया, पूजा पाठ कराया। जब शुरू में वह घर गया तो मां ने दोबारा वापस नहीं जाने देने की बात की थी। लेकिन जैसे-जैसे समय बीता तो सबको लगा कि घर में रहने से तो काम नहीं चलेगा। बताया कि उन्हें जो पैसा उत्तरखंड सरकार और निर्माण कंपनी से मिला था। उसका उसने खुद के नाम पर एफडी करवाया है। सोविक ने बताया कि अभी उसे सुरंग के अंदर नहीं भेजा गया है। बाहर ही ड्यूडी पर तैनात किया गया है।