विवाद बढ़ते ही अनुसूचित जाति वर्ग के ग्रामीणों ने कथा के लिए दिए गए सामान, बर्तन और चंदा वापस लिया। वहीं जो लकड़ियां उन्होंने कथा के लिए दी थीं, उसे और उनके बैठने के लिए लगाए टैंट को भी आग के हवाले कर दिया गया।
स्थिति को भांपते हुए गांव के बड़े-बुजुर्गों ने माहौल को शांत करवाया। वहीं मंगलवार को भी इस घटना के बाद बैठकों का दौर जारी है। कथा समिति के अध्यक्ष और बजीर कुशला सिंह रावत ने कहा कि हर वर्ग से एक-एक व्यक्ति को पूजा वर्णी के लिए चयनित किया गया है। किसी की भी अनदेखी नहीं की गई है। तहसीलदार मोरी जब्बर सिंह असवाल ने कहा कि मामला अभी उनके संज्ञान में नहीं है।