ज्यादातर नेपाल व बिहार के मजदूर थे
धराली गांव के प्रधान अजय नेगी ने बताया कि आपदा के दिन धराली में बिहार और नेपाल के मजदूर बहुत अधिक संख्या में थे। इनमें कल्प केदार मंदिर समेत कई स्थानों पर मजदूर डेरा डालकर और कमरा लेकर रह रहे थे। वहीं, कई होटलों में पर्यटक भी मौजूद थे। जिससे लापता लोगों की संख्या और बढ़ सकती है।
अपनों की तलाश में पहुंच रहे लोग
धराली आपदा के बाद राजस्थान के उदयपुर की कृतिका जैन से संपर्क नहीं हो रहा है। कृतिका की बहन उरवी ने दूरभाष पर बताया कि पांच अगस्त को सुबह पांच बजे बहन कृतिका से फोन पर बात हुई थी लेकिन दोपहर बाद फोन करने पर संपर्क नहीं हो पाया। उधर, बिजनौर निवासी योगेश से परिजनों का संपर्क नहीं हो रहा है। योगेश के पिता लेखराज बेटे की तलाश में उत्तरकाशी पहुंचे हैं। बताते हैं कि बेटा तीन माह से धराली में वेल्डिंग का काम कर रहा था। तीन अगस्त को फोन पर बात हुई थी। लेकिन आपदा के बाद कुछ पता नहीं चल रहा है।